
।। बस्ती: सरयू का सीना चीर रहे ‘सफेदपोश’ लुटेरे, DM की आंखों में धूल झोंककर हो रहा करोड़ों का बालू खेल।।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती। जनपद में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए अवैध खनन का काला कारोबार अब वीभत्स रूप ले चुका है। जिले के आला अफसर भले ही जीरो टॉलरेंस की बात करें, लेकिन धरातल पर खनन अधिकारी की सरपरस्ती में बालू माफिया सरयू नदी का सीना छलनी कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां दिनदहाड़े पोकलैंड मशीनें गरज रही हैं और दर्जनों ट्रालियां बिना किसी डर के बालू की तस्करी कर रही हैं।
👉सिल्ट सफाई की आड़ में ‘महाघोटाला’
सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल ‘सिल्ट सफाई’ की आड़ में खेला जा रहा है। नदी की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का बालू अवैध रूप से निकाला जा रहा है। यह महज आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि भविष्य की बड़ी आपदा को निमंत्रण है। जिस तरह से नदी के तल को खोखला किया जा रहा है, आगामी मानसून में बाढ़ आने पर तटबंधों (बंधों) पर सीधा खतरा मंडराएगा, जिससे हजारों ग्रामीणों की जान-माल जोखिम में पड़ सकती है।
👉अफसर-माफिया गठजोड़: वायरल वीडियो ने खोली पोल
जिले में चर्चा आम है कि खनन अधिकारी, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस के कुछ भ्रष्ट कारिंदों ने माफियाओं के साथ एक ‘खतरनाक सिंडिकेट’ बना लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि दो दिन पहले खुद खनन अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर माफियाओं को कार्रवाई न करने का ‘अभयदान’ दिया।
इस अवैध साम्राज्य के मुख्य चेहरों के रूप में अभिषेक सिंह और विनोद यादव का नाम तेजी से उभर रहा है। चर्चा है कि खनन अधिकारी से इनकी नजदीकी इतनी गहरी है कि अवैध खनन स्थल पर ही बैठकों का दौर चलता है। सूत्रों का सनसनीखेज दावा है कि— “कार्रवाई की उम्मीद मत रखिए, क्योंकि ऊपर तक हिस्सा पहुंच चुका है।”
👉रिंग रोड में खप रही ‘चोरी की बालू’
बिना किसी वैध परमिट या सरकारी आदेश के, रोज़ाना लाखों रुपये की बालू निकालकर रिंग रोड के निर्माण कार्य में खपाई जा रही है। सरकारी प्रोजेक्ट की आड़ में माफिया अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और सरकारी राजस्व को हर दिन लाखों का चूना लगाया जा रहा है।
👉सच बोलने पर ‘डेथ वारंट’?
इस पूरे मामले का सबसे काला पक्ष यह है कि जब कोई पत्रकार या सजग नागरिक इस भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिश करता है, तो उसे चुप कराने की साजिशें रची जाती हैं। पुख्ता सूचना है कि सच दिखाने वाले पत्रकारों पर जानलेवा हमले की योजना बनाई गई है ताकि खौफ का माहौल बना रहे और यह लूट बिना किसी बाधा के चलती रहे।
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
🔥जब दिनदहाड़े पोकलैंड चल रही है, तो खनन अधिकारी की नजरों से यह ओझल क्यों है?
🔥क्या जिला प्रशासन को किसी बड़ी आपदा (बाढ़/तटबंध टूटने) का इंतजार है?
🔥माफियाओं के साथ बैठक करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
🔥क्या बस्ती में कानून का राज खत्म होकर ‘माफिया राज’ स्थापित हो चुका है?
बस्ती में कानून फाइलों में कैद है और जमीन पर माफिया का फरमान चल रहा है। अब देखना यह है कि क्या शासन प्रशासन इस ‘काकस’ को तोड़ने की हिम्मत दिखा पाता है या फिर भ्रष्ट तंत्र की गोद में बैठकर सरयू को लुटते देखता रहेगा।










