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आकारी में ‘यमराज’ का एजेंट सक्रिय, सफेद कोट में छिपा है मौत का सौदागर!

झोलाछाप का कहर: इलाज के नाम पर श्मशान का रास्ता खोल रहा है यह फर्जी बंगाली।

🏥आकारी में ‘यमराज’ का एजेंट सक्रिय, इलाज के नाम पर बांटी जा रही है मौत!🏥

⭐खौफनाक सच: न डिग्री, न ज्ञान… मासूमों की नसों में उतारा जा रहा है ‘धीमा जहर’।

⭐ अस्पताल या कसाईखाना? आकारी में मरीजों की जिंदगी की सरेआम नीलामी।

⭐”अगर आप भी आकारी के इस ‘बंगाली’ के पास जाते हैं, तो संभल जाइए… अगला नंबर आपका हो सकता है!”

⭐”बस्ती का ‘डॉक्टर डेथ’: बिना सर्टिफिकेट मेडिकल साइंस का कत्ल कर रहा है यह शिकारी।”

⭐”प्रशासन सोया है और आकारी में ‘लाशें बिछाने’ की तैयारी पूरी है—पढ़िए ‘खोजी’ की विशेष रिपोर्ट।”

बस्ती | अजीत मिश्रा (खोजी), ब्यूरो प्रमुख – बस्ती मंडल

बस्ती: जिले के आकारी क्षेत्र से एक ऐसी खौफनाक हकीकत सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। जिसे लोग बीमारी से निजात पाने के लिए ‘डॉक्टर’ समझ रहे हैं, दरअसल वह सफेद कोट में छिपा ‘मौत का सौदागर’ है। यह तथाकथित ‘पकड़डाड़ वाला’ बंगाली डॉक्टर मेडिकल प्रैक्टिस की आड़ में सीधे श्मशान का रास्ता खोल रहा है।

💫डिग्री नहीं, दगाबाजी का धंधा

बिना किसी डॉक्टरी पढ़ाई और बिना वैध सर्टिफिकेट के, यह झोलाछाप मासूमों की नसों में जहर जैसा इंजेक्शन उतार रहा है। आकारी की एक गंदी दुकान के पीछे मरीजों की जिंदगी की सरेआम नीलामी हो रही है। सवाल यह उठता है कि यह अस्पताल है या कसाईखाना? यहाँ इलाज नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से गलाने वाली धीमी मौत का सामान बेचा जा रहा है।

💫मजबूरी की मंडी और लालच का खेल

यह जालसाज लोगों की लाचारी और अज्ञानता का फायदा उठाकर अपनी जेबें गरम कर रहा है। इसके पास जाने का मतलब है—अपनी मौत के वारंट पर खुद दस्तखत करना। मेडिकल साइंस का सरेआम कत्ल कर रहा यह अनपढ़ शिकारी अब तक कई जिंदगियों से खिलवाड़ कर चुका है।

“प्रशासन की चुप्पी पर सवाल: आखिर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की आंखों पर पट्टी क्यों बंधी है? क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी या लाशों के ढेर लगने का इंतजार कर रहा है?”

💫सावधान आकारी! अब जागने का वक्त है

अगर समय रहते इस फर्जी बंगाली को जड़ से उखाड़ फेंका नहीं गया, तो आकारी के घर-घर में मातम मचना तय है। यह लेख सिर्फ खबर नहीं, बल्कि उन सोए हुए अफसरों के लिए चेतावनी है जो कानून की धज्जियां उड़ते देख भी मौन हैं।

जनता को स्वयं जागरूक होना होगा। इस नरक के द्वार पर दस्तक देना बंद करें और प्रशासन से मांग करें कि ऐसे ‘नरभक्षियों’ को तत्काल जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए।

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