
धमतरी /नगरी :- छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग की बहुप्रतीक्षित बटनहर्रा जलाशय क्रमांक–02 योजना अब गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही का प्रतीक बनती जा रही है। ग्राम गट्टासिली क्षेत्र में किसानों की सिंचाई के लिए शुरू किया गया यह कार्य पिछले 2 वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
करीब 191.51 लाख रुपये की लागत से शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य 108 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देना था, लेकिन हकीकत में यह योजना कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। नहरों का निर्माण अधूरा है और जहां काम हुआ भी है, वहां घटिया गुणवत्ता के कारण नहरें टूटने लगी हैं। स्थिति इतनी खराब है कि पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही बहकर बर्बाद हो रहा है, जिससे किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण एजेंसी एम.एम. श्रृंग कंस्ट्रक्शन (अंबिकापुर) द्वारा कार्य में भारी लापरवाही बरती गई है। नहरों की हालत जर्जर है और कई जगहों पर लीकेज इतना अधिक है कि पानी रोकने के लिए ग्रामीणों को खुद आगे आना पड़ा। ग्रामीणों ने मिट्टी और बोरी डालकर गेट के लीकेज को बंद करने का प्रयास किया, जो प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।
ग्राम सरपंच गंगेश सलाम सहित कई ग्रामीणों—संजय मरकाम, लाभा नेताम, केश नाथ नेताम, फग्नु राम नेताम, मुकेश मरकाम, आगत भास्कर, खरकाभरी, रामकुमार, पुप्पा बाई, किरण नेताम, यशोदा बाई—ने एक स्वर में कहा कि जब पानी खेतों तक पहुंच ही नहीं रहा, तो पानी टैक्स किस आधार पर वसूला जा रहा है? इसी विरोध में ग्रामीणों ने टैक्स देने से साफ इनकार कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि दो वर्षों से हालात जस के तस बने हुए हैं, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
इस पूरे मामले में क्षेत्र के लोगों ने उच्च स्तर पर जांच की मांग करते हुए दोषी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, इस संबंध में एसडीओ नगरी ने जानकारी लेते हुए कहा है कि ठेकेदार द्वारा जल्द ही कार्य पुनः शुरू करने की बात कही गई है, लेकिन ग्रामीणों का सवाल है—“आखिर कब तक केवल आश्वासन ही मिलता रहेगा?”






