
प्रेस विज्ञप्ति
विश्व जैव विविधता दिवस 2026 पर राज्य वन प्रशिक्षण संस्थान, गया में जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
विश्व जैव विविधता दिवस 2026 के अवसर पर आज राज्य वन प्रशिक्षण संस्थान, गया में व्यापक जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम Convention on Biological Diversity द्वारा निर्धारित वर्ष 2026 की थीम “Acting Locally for Global Impact” अर्थात “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव के लिए” पर आधारित था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के महत्व, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में इसकी भूमिका तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करने के संबंध में जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में गया वन प्रमंडल के पदाधिकारी एवं कर्मियों के साथ-साथ प्रशिक्षु वनरक्षियों, स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC) के सदस्यों, स्थानीय ग्रामीणों एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, पारिस्थितिक संतुलन एवं मानव जीवन में जैव विविधता की उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व के संदेश के साथ की गई। उपस्थित प्रतिभागियों को बताया गया कि विश्व जैव विविधता दिवस का उद्देश्य केवल जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करना ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे संरक्षण प्रयासों के माध्यम से वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में प्रेरित करना भी है। वर्ष 2026 की थीम “Acting Locally for Global Impact” इस बात पर बल देती है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति, समुदाय एवं संस्था अपने आसपास के पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण हेतु जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करे, तो उसका सकारात्मक प्रभाव संपूर्ण विश्व पर पड़ेगा।
जागरूकता सह प्रशिक्षण सत्र का संचालन श्री एस. के. इमरान, पीएच.डी. शोधार्थी एवं बिहार राज्य जैव विविधता परियोजना सहयोगी, Central South Bihar University, सुश्री दिव्या कुमार, पीएच.डी. शोधार्थी, Central South Bihar University तथा श्री सम्पद सम्राट सेनापति, पीएच.डी. शोधार्थी, Central South Bihar University द्वारा किया गया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को जैव विविधता संरक्षण के वैज्ञानिक, सामाजिक एवं व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
श्री एस. के. इमरान ने अपने प्रस्तुतीकरण में कहा कि बिहार जैसे जैविक एवं सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध राज्य में स्थानीय समुदायों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वन, जल, भूमि एवं वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामुदायिक भागीदारी और जन-जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग्रामीण स्तर पर पारंपरिक ज्ञान एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की परंपरा को पुनर्जीवित करना समय की आवश्यकता है।
सुश्री दिव्या कुमार ने अपने संबोधन में जैव विविधता और मानव जीवन के पारस्परिक संबंधों की चर्चा करते हुए बताया कि स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, खाद्य सुरक्षा एवं औषधीय संसाधनों का आधार जैव विविधता ही है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, वनों की कटाई एवं प्रदूषण के कारण जैव विविधता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है, जिसे रोकने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।
श्री सम्पद सम्राट सेनापति ने प्रतिभागियों को स्थानीय स्तर पर किए जा सकने वाले संरक्षण उपायों की जानकारी दी। उन्होंने वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक उपयोग में कमी, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण तथा स्थानीय वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की सुरक्षा को जैव विविधता संरक्षण के प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे स्थानीय प्रयास मिलकर वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन श्री शशिकांत कुमार, प्रभागीय वन पदाधिकारी, गया वन प्रमंडल के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी पर्यावरणीय आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं तथा यदि जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है तो उसका प्रतिकूल प्रभाव मानव समाज पर भी पड़ता है। उन्होंने प्रशिक्षु वनरक्षियों एवं स्थानीय समुदायों से पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।
उन्होंने आगे कहा कि गया वन प्रमंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं तथा भविष्य में भी स्थानीय समुदायों की सहभागिता से जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूक रहने एवं समाज में इसके प्रति सकारात्मक संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के बीच संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें वन एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। प्रशिक्षु वनरक्षियों एवं ग्रामीण प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा जैव विविधता संरक्षण हेतु स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक उपायों एवं सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर प्रकृति संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाए, तो “Acting Locally for Global Impact” की अवधारणा को वास्तविक रूप दिया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर गयाजी बिहार
वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़





