

प्रयागराज के चर्च स्कूल में महिला प्रिंसिपल से दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी का सनसनीखेज मामला दर्ज
डायोसिस एजुकेशन बोर्ड के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप, FIR दर्ज होने के बाद शिक्षा जगत में मचा हड़कंप
प्रयागराज से एक बेहद सनसनीखेज और चर्चित मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत, चर्च प्रशासन और सामाजिक संगठनों में भारी हलचल मचा दी है। कर्नलगंज थाने में दर्ज एक FIR में एक महिला प्रिंसिपल ने डायोसिस ऑफ लखनऊ से संबद्ध शिक्षा संस्था के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों में यौन शोषण, जबरन शारीरिक संबंध बनाने, मानसिक प्रताड़ना, नौकरी से निकालने की धमकी और जान से मारने की धमकी जैसे बेहद गंभीर अपराध शामिल हैं।
मामला सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। FIR में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें डायोसिसयन एजुकेशन बोर्ड (डीईबी) लखनऊ से जुड़े कथित पदाधिकारी और अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
महिला प्रिंसिपल ने लगाए गंभीर आरोप
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला प्रयागराज स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं। महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि डायोसिसयन एजुकेशन बोर्ड से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों ने लंबे समय तक उनका मानसिक, शारीरिक और यौन शोषण किया।
महिला का आरोप है कि वह एक तलाकशुदा महिला हैं और इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया। FIR में कहा गया है कि आरोपियों ने नौकरी से निकालने की धमकी देकर उन्हें दबाव में रखा और कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब महिला ने विरोध किया तो उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने किसी को कुछ बताया तो उनका वही हाल किया जाएगा जो “पास्टर सोलोमन” का हुआ था। इस कथित धमकी के बाद महिला काफी समय तक भय और मानसिक तनाव में रही।
FIR में किन-किन लोगों के नाम?
दर्ज मुकदमे में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं उनमें प्रमुख रूप से—
- राकेश चत्री (कथित सचिव)
- मॉरिस एडगर दान (कथित चेयरमैन)
- एलनदान
- महिला के पूर्व पति विशाल नोबल सिंह
के नाम शामिल बताए गए हैं।
दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला कर्नलगंज थाना, प्रयागराज में FIR संख्या 0145/2026 के रूप में दर्ज किया गया है। मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
दर्ज FIR के अनुसार पुलिस ने मामले की जांच उपनिरीक्षक अनुराग मिश्रा को सौंपी है। पुलिस अब पूरे प्रकरण की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस संबंधित दस्तावेजों, कॉल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य संभावित गवाहों के बयान जुटाने की तैयारी कर रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद चर्च और शिक्षा संस्थानों से जुड़े लोगों में भी बेचैनी देखी जा रही है। कई सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महिला ने परिवार की सुरक्षा की लगाई गुहार
शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस और प्रशासन से अपने तथा अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की है। FIR में उल्लेख है कि उन्हें और उनके बच्चों को जान का खतरा है। महिला ने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा नहीं दी गई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।
महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से तोड़ा गया और दबाव बनाकर चुप रहने को कहा गया। उन्होंने यह भी कहा कि अब वह इस अत्याचार को और सहन नहीं कर सकती थीं, इसलिए पुलिस की शरण में पहुंचीं।
शिक्षा जगत में मचा हड़कंप
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत में भारी हलचल मच गई है। चर्च संचालित स्कूलों और संस्थानों में कार्यरत लोगों के बीच भी इस प्रकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो रहा है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
कई लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शिक्षा और धार्मिक संस्थाओं की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। वहीं कुछ लोग इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की बात भी कह रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों ने क्या कहा?
कानूनी जानकारों के अनुसार FIR में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया है, वे गंभीर प्रकृति की हैं। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चर्च प्रशासन पर उठ रहे सवाल
मामले के बाद चर्च प्रशासन और संबंधित शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि लंबे समय से इस प्रकार की घटनाएं हो रही थीं तो संबंधित संस्थाओं ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
हालांकि अभी तक आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
जैसे ही FIR की प्रतियां सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, मामला चर्चा का विषय बन गया। लोग महिला की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी मामले पर संज्ञान लेने की बात कही है।
पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर
अब सभी की नजर प्रयागराज पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर सकती है और मामले में बड़े खुलासे भी हो सकते हैं।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो सकता है। वहीं दूसरी ओर आरोपियों के समर्थक इस पूरे मामले को साजिश करार देने की कोशिश में भी जुटे हुए बताए जा रहे हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की प्रक्रिया जारी है। मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है और लोग अब पुलिस जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
प्रदेश महासचिव – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
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