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बस्ती: डॉक्टर साहब ने मरीज से इलाज का पैसा पत्नी के खाते में ‘मंगवाया’, सीएम पोर्टल पर शिकायत।

पीएचसी डॉक्टर का कारनामा: घर पर इलाज कर वसूल रहे 'फीस', पत्नी के क्यूआर कोड पर ले रहे पेमेंट। इलाज के बदले 'मेडिकल रिपोर्ट' का सौदा? मरीज ने डॉक्टर पर लगाया गंभीर वसूली का आरोप।

​अजीत मिश्रा खोजी

‘डॉक्टर’ साहब ने ‘मरीज’ से इलाज का पैसा ‘पत्नी’ के खाते में लिया: जांच की मांग

  • बहादुरपुर पीएचसी के डॉक्टर पर अवैध वसूली की आंच, पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए पैसे।
  • सरकारी अस्पताल या ‘निजी दुकान’? रात में घर बुलाकर किया इलाज, मांगी मोटी रकम।
  • ‘मरीज’ का इलाज, ‘पत्नी’ के खाते में कमाई: डॉक्टर साहब की बढ़ी मुश्किलें।
  • पैसे कम मिले तो रिपोर्ट भी बदल दी! सरकारी डॉक्टर पर लगा गंभीर आरोप।
  • बस्ती में सरकारी डॉक्टर का ‘डिजिटल’ खेल: इलाज का पैसा पत्नी को भेजा, शिकायत दर्ज।

बस्ती: जिले में चिकित्सा व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। पीएचसी (PHC) बहादुरपुर के डॉक्टर प्रभाकर चौधरी पर इलाज के नाम पर निजी आवास पर पैसे वसूलने और उसे अपनी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई है, जिसके बाद से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

​मामला क्या है?

​नगर थाना क्षेत्र के ग्राम करहली बुजुर्ग निवासी सहाबुद्दीन पुत्र फतेह मोहम्मद ने शिकायत में बताया कि मारपीट की एक घटना में वह घायल हो गए थे। चोटों के इलाज और मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराने के सिलसिले में वह 22 मई 2026 की रात को डॉक्टर प्रभाकर चौधरी के निजी आवास पर पहुंचे।

​आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज और ‘बढ़िया मेडिकल रिपोर्ट’ बनाने के लिए 10,000 रुपये की मांग की। जब सहाबुद्दीन ने सहमति जताई, तो डॉक्टर ने सरकारी स्कैनर के बजाय अपनी पत्नी प्रीति वर्मा का पेमेंट स्कैनर (QR Code) उन्हें दिया और उसी पर पैसे भेजने को कहा।

​3,200 रुपये का ट्रांजेक्शन और ‘धमकी’

​सहाबुद्दीन ने अपने परिचित रवीश कुमार के माध्यम से प्रीति वर्मा के खाते में 3,200 रुपये ट्रांसफर किए। डिजिटल ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट भी उपलब्ध है, जिसमें पेमेंट ‘प्रीति वर्मा’ के नाम पर भेजा गया है। आरोप है कि पूरी रकम न मिलने पर डॉक्टर ने उन्हें डांट-डपट भी की।

​पीड़ित का आरोप है कि पैसे कम मिलने के कारण डॉक्टर ने उनकी गंभीर चोटों को ‘नॉर्मल’ बताकर मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर दी, जिससे उन्हें कानूनी रूप से नुकसान हुआ।

​डॉक्टर का पक्ष

​जब इस मामले में डॉक्टर प्रभाकर चौधरी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपने बचाव में तर्क दिया कि अस्पताल में इलाज पूरी तरह से मुफ्त होता है, लेकिन मरीज उनके निजी आवास पर रात के समय आया था। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने मरीज की मरहम-पट्टी की और उसी के एवज में वह पैसा लिया जो दवाइयों और अन्य सामान पर खर्च हुआ था।

​उठ रहे सवाल

  • सरकारी डॉक्टर का निजी आवास पर इलाज: क्या सरकारी नियमों के तहत डॉक्टर का निजी आवास पर पैसे लेकर इलाज करना वैध है?
  • पत्नी का स्कैनर क्यों: यदि पैसा अस्पताल के खर्च का था, तो डॉक्टर ने अपना स्कैनर देने के बजाय अपनी पत्नी का स्कैनर क्यों दिया?
  • मेडिकल रिपोर्ट में हेरफेर: क्या पैसे की लेनदेन के आधार पर ही मेडिकल रिपोर्ट की गंभीरता तय की गई?

​निष्कर्ष

​पीड़ित ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर डॉक्टर के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे प्रकरण में डिजिटल साक्ष्य (पेमेंट रसीद) मौजूद होने के कारण अब जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यह मामला अब इस जांच का विषय है कि क्या वास्तव में सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली की गई है।

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