बस्ती: ‘सीएचसी’ की स्टाफ नर्स ‘कुसुम’ पर केस दर्ज, नवजात का सिर धड़ से अलग होने का मामला
कुदरहा सीएचसी का शर्मनाक सच: प्रसव के दौरान नवजात का सिर धड़ से अलग, अस्पताल संचालक की दबंगई उजागर बस्ती में स्वास्थ्य व्यवस्था का भयावह चेहरा: ‘बाबूजी’ के संरक्षण में चल रहा था अवैध अस्पताल, प्रसूता को झेलना पड़ा असहनीय दर्द
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: रसूख और लापरवाही की भेंट चढ़ा नवजात, ‘बाबूजी’ के साये में फल-फूल रहा अवैध कारोबार
- मैक्स हॉस्पिटल की लापरवाही: मासूम की मौत के बाद स्टाफ नर्स कुसुम और अस्पताल के 3 अन्य पर मुकदमा
- अवैध अस्पताल, दादागिरी और मौत: रसूख के सामने घुटने टेके स्वास्थ्य विभाग ने?
बस्ती, उत्तर प्रदेश: स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी का एक अत्यंत वीभत्स चेहरा बस्ती (यूपी) के कुदरहा सीएचसी क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ एक नवजात की दर्दनाक मौत और उसकी मां की नाजुक हालत ने न केवल चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि रसूखदार लोगों के संरक्षण में चल रहे अवैध मेडिकल धंधों की भयावह सच्चाई को भी उजागर कर दिया है।
घटना का विवरण: जब लापरवाही बनी हत्या
यह हृदयविदारक घटना नीरज चौधरी के ‘मैक्स हॉस्पिटल’ में घटी। आरोप है कि संविदा स्टाफ नर्स कुसुम और उनके सहयोगियों ने वादी की पुत्रवधू, प्रेमा देवी (पत्नी नीरज कुमार), का प्रसव अत्यंत लापरवाही पूर्वक करवाया। इस प्रक्रिया के दौरान नवजात का सिर धड़ से अलग होकर गर्भ में ही रह गया और धड़ बाहर आ गया। यह चिकित्सा जगत की अब तक की सबसे क्रूर और लापरवाही भरी घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
रसूख का जाल और ‘बाबूजी’ का संरक्षण
इस पूरे मामले में अस्पताल संचालक नीरज चौधरी की दबंगई और प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
- अवैध पैथोलॉजी: नीरज चौधरी बिना किसी वैध लाइसेंस के सीएचसी के ठीक सामने ‘मैक्स पैथोलॉजी’ चला रहा है, जिस पर कार्रवाई करने की हिम्मत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं जुटा पाते।
- प्रशासनिक मिलीभगत: आरोप है कि डिप्टी सीएमओ डॉ. एके चौधरी और डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह का इसे खुला संरक्षण प्राप्त है, जिसे लोग ‘बाबूजी’ का दुलार कहते हैं।
- अधिकारियों की चुप्पी: कहा जा रहा है कि डीआई (DI) तक इस अवैध धंधे से अपना हिस्सा लेते हैं, जिसके कारण इस अस्पताल के खिलाफ कोई बोलने की हिम्मत नहीं करता।
- दबंगई का आलम: यह संचालक एमओआईसी (MOIC) और डॉक्टरों को खुलेआम गाली-गलौज देता है और मनमानी करते हुए सीएचसी से मरीजों को जबरन अपने अवैध अस्पताल ले जाता है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की राह
घटना के बाद, स्टाफ नर्स कुसुम और अस्पताल के तीन अन्य कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अस्पताल को सील कर दिया गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल सीलिंग ही पर्याप्त है?
- पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि जो लोग इस दर्दनाक हादसे के जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
- केवल स्टाफ नर्स ही नहीं, बल्कि उस अस्पताल के मालिक और उसे संरक्षण देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस ‘गुलाम व्यवस्था’ का आईना है, जहाँ मासूमों की जान से अधिक महत्व ‘बाबूजी’ के रसूख को दिया जाता है।














