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बस्ती: दसिया में 350 करोड़ की एथेनॉल फैक्ट्री से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर, युवाओं को मिलेगा रोजगार

बस्ती में औद्योगिक क्रांति: दसिया में जल्द शुरू होगा 350 करोड़ का एथेनॉल प्लांट, हजारों को मिलेगा काम एथेनॉल फैक्ट्री से बस्ती के विकास को रफ्तार, निदेशक सुधीर जायसवाल बोले- किसानों और बेरोजगारों के लिए सुनहरा मौका

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: दसिया में 350 करोड़ की एथेनॉल फैक्ट्री से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर, युवाओं को मिलेगा रोजगार

  • बस्ती के दसिया में स्थापित हो रही बड़ी एथेनॉल इकाई, 350 करोड़ के निवेश से बढ़ेगा रोजगार का दायरा
  • वाल्टरगंज के बाद दसिया में नई उम्मीद: प्रदूषण मुक्त एथेनॉल प्लांट के निर्माण से क्षेत्र में खुशी

बस्ती। वाल्टरगंज चीनी मिल के बंद होने के बाद ठप पड़े औद्योगिक विकास को नई गति मिलने जा रही है। जनपद के सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड क्षेत्र के दसिया गांव में 350 करोड़ रुपये की लागत से एक विशाल एथेनॉल फैक्ट्री का निर्माण अंतिम चरण में है। इस फैक्ट्री के शुरू होने से क्षेत्र के किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों को मिलेगा रोजगार

अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल अधिकारी पी.एन. पाण्डेय ने बताया कि इस इकाई के चालू होने पर लगभग 700 लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही, फैक्ट्री के आसपास के क्षेत्र में होटल, चाय-नाश्ते की दुकानों और अन्य छोटे-मोटे व्यवसायों के जरिए लगभग 2,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका प्राप्त होगी।

धान, मक्का और भूसी से बनेगा एथेनॉल

यह फैक्ट्री भारत सरकार की नीतियों के अनुरूप तैयार की जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें भूजल (पानी) का उपयोग नहीं होगा, बल्कि धान, मक्का और भूसी के माध्यम से एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। यह कदम न केवल ऊर्जा संकट को दूर करने में सहायक होगा, बल्कि देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की भी बचत करेगा।

प्रदूषण नियंत्रण और मानक पर विशेष जोर

कंपनी प्रबंधन ने दावा किया है कि फैक्ट्री पूरी तरह से पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप बनाई जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए उच्चस्तरीय व्यवस्था की गई है, जिसमें वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 72 मीटर ऊंची चिमनी और खुद का 7 मेगावाट का पावर प्लांट शामिल है। प्लांट जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कड़े मानकों पर भी खरा उतरता है।

निदेशक सुधीर जायसवाल ने विरोध को बताया निराधार

फैक्ट्री निर्माण के विरोध को लेकर पूछे गए सवाल पर निदेशक सुधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि फैक्ट्री निर्माण पूरी तरह से नियमों और मानकों के अनुसार हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध उनका निजी दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह परियोजना इस क्षेत्र के किसानों और बेरोजगारों के भविष्य को संवारने वाली है।

​क्षेत्रवासियों को इस फैक्ट्री के जल्द शुरू होने का बेसब्री से इंतजार है, जिससे न केवल इलाके की अर्थव्यवस्था सुधरेगी, बल्कि बस्ती का औद्योगिक मानचित्र भी सशक्त होगा।

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