सिद्धार्थनगर: थाना शोहरतगढ़ क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी का विरोध करने पर दबंगों ने दलित युवक पर बोला हमला, सिर फटा और शरीर पर आईं गंभीर चोटें.
घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने थाना शोहरतगढ़ में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और पूरी घटना की लिखित तहरीर पुलिस को सौंपी. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि खून से लथपथ पीड़ित के फरियाद करने और स्पष्ट सबूत होने के बावजूद थाना प्रशासन ने अभी तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है.
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में दबंगों का तांडव: खाद वितरण में कालाबाजारी का विरोध करने पर दलित युवक पर हमला, तहरीर के बावजूद FIR दर्ज नहीं
- सिद्धार्थनगर: खाद वितरण में धांधली और अवैध बिक्री का विरोध करने पर सचिव रमेश यादव और अन्य साथियों पर जातिसूचक गालियां देने और मारपीट करने का आरोप.
- शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र: खून से लथपथ पीड़ित द्वारा लिखित तहरीर देने के बावजूद पुलिस द्वारा FIR दर्ज न किए जाने से स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल.
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती/सिद्धार्थनगर । उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के थाना शोहरतगढ़ अंतर्गत एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। खाद वितरण में हो रही खुली कालाबाजारी और अवैध बिक्री का विरोध करने पर दबंगों ने एक दलित युवक को लाठी-डंडों से पीटकर लहूलुहान कर दिया. पीड़ित द्वारा थाने में लिखित तहरीर दिए जाने के बावजूद पुलिस द्वारा अब तक मुकदमा (FIR) दर्ज न किया जाना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है.
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह घटना दिनांक 3 अगस्त 2026 को शाम करीब 4 बजे की है. थाना शोहरतगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत खरगवार गांव के निवासी शैलेश कुमार पुत्र पमेश्वरी प्रसाद ने थाने में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया है कि उनके गांव में सचिव रमेश यादव द्वारा खाद का वितरण किया जा रहा था, साथ ही खाद को ब्लैक (अवैध रूप से ऊंचे दामों) में भी बेचा जा रहा था.
जब प्रार्थी शैलेश ने इस कालाबाजारी का विरोध किया, तो सचिव रमेश यादव (पुत्र सन्तराम यादव, ग्राम बाम्भरिया टोला हड़हवा), निलेश यादव (पुत्र धनश्याम यादव), धनश्याम यादव (पुत्र धनपति, निवासी महमुदवा) और चार अन्य अज्ञात लोग एकजुट होकर लाठी-डंडे के साथ मौके पर आ धमके.
जातिसूचक गालियां और जानलेवा हमला
आरोप है कि हमलावरों ने प्रार्थी को घेरकर जातिसूचक गालियां दीं और अपमानित करते हुए कहा, “चमार-निसार, चमरकिट तुमको हमारे बीच में बोलने की क्या जरूरत है? हम खाद ब्लैक में बेचें चाहे जो करें।”
इसके बाद दबंगों ने बेरहमी से लाठी-डंडों से प्रार्थी पर हमला बोल दिया. इस हमले में प्रार्थी का सिर फट गया तथा शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं. मौके पर मौजूद आसपास के लोगों की चीख-पुकार सुनकर बीच-बचाव किया, जिसके बाद हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए.
खून बहा, तहरीर दी, फिर भी टालमटोल क्यों?
घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने थाना शोहरतगढ़ में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और पूरी घटना की लिखित तहरीर पुलिस को सौंपी. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि खून से लथपथ पीड़ित के फरियाद करने और स्पष्ट सबूत होने के बावजूद थाना प्रशासन ने अभी तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है.
आखिर थाना शोहरतगढ़ पुलिस किसके दबाव में काम कर रही है? क्या खाद माफियाओं और दबंगों को पुलिस प्रशासन का खुला संरक्षण प्राप्त है? एक तरफ जहां सरकार कानून-व्यवस्था और दलित उत्पीड़न पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है, वहीं शोहरतगढ़ थाने की सुस्त और संदेहास्पद कार्यशैली इन दावों की पोल खोल रही है।
हमारी मांग:
- तत्काल FIR दर्ज हो: थाना शोहरतगढ़ पुलिस बिना किसी टालमटोल के नामजद आरोपियों (सचिव रमेश यादव, निलेश यादव, धनश्याम यादव व अन्य) के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करे.
- दबंगों की गिरफ्तारी: कानून को अपने हाथ में लेने वाले और दलित उत्पीड़न करने वाले सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए.
- खाद कालाबाजारी की जांच: खाद वितरण में संलिप्त भ्रष्ट सचिव और कालाबाजारियों के खिलाफ विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्रवाई हो.
यदि पीड़ित को जल्द न्याय नहीं मिला और दोषियों पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो इस अन्याय के खिलाफ मीडिया द्वारा जनआंदोलन और उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया जाएगा।


















