खरीद और भर्ती के मामले में पूर्व सीएमओ के खिलाफ फिर से जांच: विजिलेंस टीम ने सात दिन में मांगे गए खरीद, आयुष्मान और आशा संगिनी भर्ती से जुड़े अभिलेख।
यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। शासन स्तर पर शिकायतें मिलने और जिलाधिकारी द्वारा जांच की आवश्यकता जताए जाने के बाद यह मामला विजिलेंस को सौंपा गया था।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती स्वास्थ्य विभाग में भूचाल: पूर्व सीएमओ के कार्यकाल की खरीद और भर्तियों पर विजिलेंस का शिकंजा
- आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों की भी होगी जांच: विजिलेंस ने आवास विकास कॉलोनी स्थित एफ.आई. हॉस्पिटल के आयुष्मान योजना में शामिल होने की तिथि और उपचारित मरीजों का विवरण मांगा है।
- विभागीय कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में: तत्कालीन सीएमओ के कार्यकाल में प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों में लिपिकों की भूमिका की भी होगी पड़ताल।
- आशा संगिनी भर्ती भी जांच के दायरे में: विजिलेंस ने लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व हुई आशा संगिनी भर्ती प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है, जिसमें विज्ञापन, प्राप्त आवेदन और चयनित अभ्यर्थियों का विवरण मांगा गया है।
बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक धांधलियों के चलते सुर्खियों में आ गया है। जिले के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. आरएस दुबे के कार्यकाल के दौरान हुई करोड़ों रुपये की खरीद-फरोख्त और भर्तियों के मामलों में विजिलेंस (सतर्कता विभाग) ने अपनी जांच तेज कर दी है। विजिलेंस टीम ने सात दिनों के भीतर तमाम महत्वपूर्ण अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुई जांच?
- कार्यकाल और शिकायतें: डॉ. आरएस दुबे अक्टूबर 2023 से फरवरी 2025 तक बस्ती के सीएमओ पद पर तैनात रहे। उनके इसी कार्यकाल के दौरान दवा खरीद, भर्ती प्रक्रियाओं और अन्य वित्तीय मामलों में भारी अनियमितता होने की शिकायतें शासन स्तर पर की गई थीं।
- जिलाधिकारी की रिपोर्ट और विजिलेंस एंट्री: शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा मामले की जांच की आवश्यकता जताए जाने के बाद इस प्रकरण को विजिलेंस को सौंप दिया गया था।
- विजिलेंस का पत्र: विजिलेंस अधीक्षक की ओर से सीएमओ को भेजे गए पत्र में पूर्व सीएमओ के कार्यकाल से जुड़े कई बिंदुओं पर प्रमाणित अभिलेख मांगे गए हैं।
जांच के दायरे में शामिल प्रमुख बिंदु
- उपस्वास्थ्य केंद्र और स्टेशनरी खरीद: जांच के दायरे में जिले के 81 किराए के स्वास्थ्य उपकेंद्रों का संचालन और उन पर हुए लगभग 1.60 करोड़ रुपये के बजट का व्यय शामिल है। इसके अलावा, स्टेशनरी खरीद के लिए आवंटित लगभग 50 लाख रुपये के बजट की खरीद, निविदा प्रक्रिया, और जेम (GeM) पोर्टल से जुड़ी नियमावली और शासन के आदेशों के अभिलेख भी मांगे गए हैं।
- अस्पतालों का बजट और आयुष विंग: जुलाई 2024 में वर्ष 2025 तक संचालित होने वाले आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी अस्पतालों के लिए आवंटित बजट, दवा खरीद, ओपीडी रजिस्टर तथा विभिन्न मदों में हुए व्यय का पूरा ब्योरा तलब किया गया है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।
आयुष्मान योजना और फर्जीवाड़े के संकेत
- अस्पतालों की संलिप्तता: विजिलेंस अब आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों की भी सूक्ष्मता से जांच कर रहा है।
- एफ.आई. हॉस्पिटल की जांच: आवास विकास कॉलोनी स्थित ‘एफ.आई. हॉस्पिटल’ के आयुष्मान योजना में शामिल होने की तिथि, वर्ष 2025 तक उपचारित मरीजों का विवरण और संबंधित अभिलेख मांगे गए हैं।
- अधिकारियों की भूमिका: योजना से संबद्ध अस्पतालों के संबंध में एडी हेल्थ और सीएमओ की भूमिका से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ जांच के लिए एक नोडल अधिकारी नामित कर उनका नाम, पद और मोबाइल नंबर भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
आशा संगिनी भर्ती प्रक्रिया भी रडार पर
- भर्ती में धांधली की आशंका: विजिलेंस ने लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व हुई आशा संगिनी भर्ती प्रक्रिया की भी जांच शुरू कर दी है।
- मांगे गए दस्तावेज: इसके तहत भर्ती से संबंधित शासनादेश, विज्ञापन, प्राप्त आवेदन, साक्षात्कार में शामिल अभ्यर्थियों की संख्या, चयनित अभ्यर्थियों का विवरण और यदि भर्ती नहीं हुई तो उसके कारणों की जानकारी मांगी गई है। इस प्रक्रिया में भी एडी हेल्थ और सीएमओ की भूमिका के अभिलेख तलब किए गए हैं।
विभागीय कर्मचारियों और बाबुओं की कार्यप्रणाली पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन सीएमओ के कार्यकाल में विभाग के कुछ कर्मचारियों और प्रशासनिक-वित्तीय निर्णय लेने वाले लिपिकों (बाबुओं) की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। चर्चा है कि कई प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों में बाबुओं की संलिप्तता की पड़ताल होगी। बताया जाता है कि पूर्व सीएमओ ने इनमें से एक बाबू के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भी लिखा था, लेकिन इसके बावजूद अभी तक उस बाबू पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
वर्तमान में डॉ. आरएस दुबे सुल्तानपुर जिले के रहने वाले हैं और उनकी वर्तमान तैनाती प्रयागराज जिला अस्पताल में बताई जा रही है।
अधिकारियों के पक्ष
- पूर्व सीएमओ डॉ. आरएस दुबे का कहना है: “पूर्व में इस प्रकरण की जांच हो चुकी है, खरीद संबंधित अभिलेख भी दिए जा चुके हैं, फिर से प्रकरण की जांच कैसे शुरू हुई पता नहीं, यदि जांच में सहयोग मांगा जाएगा तो वह उपलब्ध रहेंगे। खरीद जो भी हुआ था नियमानुसार है.”
- वर्तमान सीएमओ डॉ. राजीव निगम का कहना है: “पूर्व में हुए खरीद प्रकरण से जुड़े मामले की विजिलेंस जांच संबंधित पत्र आया है। एसपी विजिलेंस की ओर से जो अभिलेख मांगे गए हैं, उसको एकत्र करके भेजा जा रहा है। जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा.”















