उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती जिले के लालगंज स्थित उदय H.P. गैस एजेंसी का मामला: संगीता नामक महिला ने पुलिस अधीक्षक, बस्ती को शिकायत-पत्र सौंपा है।

गंभीर आरोप: एजेंसी संचालक/संरक्षक और कर्मचारियों पर मारपीट, अभद्र व्यवहार, धमकी देने और अर्धनग्न करने का आरोप लगाया गया है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी के साये में सुलगती दबंगई: उदय एच.पी. गैस एजेंसी बना आतंक का अड्डा, या उपभोक्ताओं का उत्पीड़न?

  • सीसीटीवी बंद कर मारपीट का दावा: पीड़िता का आरोप है कि पति के बचाने आने पर कर्मचारियों (रविन्द्र, शिवचरन, मुलायम, अभिषेक मौर्या व अन्य) ने कैमरे बंद कर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की।
  • पुलिस की भूमिका पर सवाल: डायल 112 द्वारा कार्रवाई न करने और लालगंज चौकी पुलिस द्वारा पीड़ित पति को ही थाने में बंद करने की शिकायत की गई है।
  • कार्रवाई की मांग: पीड़िता ने दोषियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
  • स्थान: लालगंज, बस्ती (उत्तर प्रदेश)
  • मुख्य घटना: महिला उपभोक्ता और उसके पति के साथ गैस एजेंसी परिसर में बेरहमी से मारपीट, अभद्रता और अर्धनग्न करने का गंभीर आरोप
  • आरोपी: एजेंसी के संरक्षक धीरेंद्र, उनके पुत्र, कर्मचारी (रविन्द्र, शिवचरन, मुलायम, अभिषेक मौर्या) एवं अन्य अज्ञात
  • प्रशासनिक भूमिका पर सवाल: डायल 112 की निष्क्रियता और लालगंज चौकी पुलिस द्वारा उल्टा पीड़ित पक्ष (पति) को थाने में बंद करने की गंभीर शिकायत

बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित उदय एच.पी. गैस एजेंसी इन दिनों जनसेवा के बजाय कथित तौर पर दबंगई और तानाशाही का पर्याय बनती जा रही है। यहाँ सिलेंडर लेने आने वाले उपभोक्ता अब गैस की खुश्बू से नहीं, बल्कि एजेंसी के नुमाइंदों के खौफ और लाठियों के साये से डरने लगे हैं। क्या गैस एजेंसी अब जनता को ईंधन देने के नाम पर उनका खून चूसने और लहूलुहान करने का लाइसेंस पा चुकी हैं?

​ताज़ा मामला रोंगटे खड़े कर देने वाला है। वर्तनिया निवासिनी संगीता (पत्नी उमेश) द्वारा पुलिस अधीक्षक महोदय को सौंपे गए शिकायती पत्र ने प्रशासनिक व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। आरोप है कि 30 जुलाई 2026 को जब यह महिला घंटों कतार में खड़े रहने के बाद अपने नंबर का इंतजार कर रही थी, तो एजेंसी के कथित संरक्षक धीरेंद्र और उनके पुत्र ने अपनी सामंती मानसिकता का परिचय देते हुए न सिर्फ अभद्र गालियां दीं, बल्कि लाइन बदलने का फरमान सुनाया।

​हद तो तब पार हो गई जब महिला ने इसका विरोध किया। बालों से खींचकर उसे केबिन में ले जाना, उसके साथ मारपीट कर उसे अर्धनग्न कर देना—यह किसी सभ्य समाज की तस्वीर नहीं, बल्कि किसी जंगलराज का जीवंत दृश्य प्रतीत होता है। जब पीड़िता का पति बीच-बचाव करने पहुँचा, तो रविन्द्र, शिवचरन, मुलायम, अभिषेक मौर्या समेत कुछ अज्ञात बदमाशों ने सीसीटीवी कैमरे बंद कर दोनों पति-पत्नी को अधमरा होने तक पीटा।

खाकी की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल

​इस वीभत्स घटना के बाद जो हुआ, वह पुलिसिया तंत्र पर एक बड़ा कलंक है। पीड़िता द्वारा डायल 112 पर सूचना देने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की। उल्टा, लालगंज चौकी की पुलिस ने आरोपियों पर शिकंजा कसने के बजाय पीड़ित पति को ही उठाकर हवालात में बंद कर दिया। आखिर किसके संरक्षण में पल रहे हैं ये दबंग? क्या पुलिस प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी लाश के गिरने का इंतजार कर रहा है?  FB IMG 1785551446946

​यह सिर्फ एक महिला का उत्पीड़न नहीं है, बल्कि यह खुली चुनौती है उन तमाम व्यवस्थाओं को जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का दम भरती हैं। यदि समय रहते जिला प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारी इस गैस एजेंसी के संचालकों और संलिप्त कर्मचारियों पर सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सलाखों के पीछे नहीं भेजते, तो यह माना जाएगा कि खाकी और दबंगों की यह साठगांठ आम जनता को कुचलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

​बस्ती की जनता अब न्याय चाहती है—और वह भी बिना किसी लीपापोती के!

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