बस्ती के घघौवा में अवैध खनन पर प्रशासनिक दावों की खुली पोल, सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी निकाले जाने पर उठे गंभीर सवाल।
चर्चाओं के केंद्र में रहे घघौवा चौकी प्रभारी पंकज त्यागी के ट्रांसफर के बाद यह मामला तूल पकड़ गया है। विदाई की बेला में या तबादले के ठीक बाद इस तरह की 'दिखावे की कार्रवाई' ने स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोग दबी जुबान से पूछ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई किसी सोची-समझी रणनीति के तहत सिर्फ दाग धोने के लिए की गई है?
अजीत मिश्रा (खोजी)
घघौवा में अवैध खनन पर दिखावे की कार्रवाई? एक ट्रॉली सीज, सैकड़ों का हिसाब गायब
- रिधौरा के सरकारी तालाब से माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर मिट्टी उत्खनन का आरोप, ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
- महीनों तक बेखौफ जारी रहा अवैध खनन का खेल, एक ट्रॉली सीज कर कार्रवाई का ढिंढोरा पीटने पर महकमे की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में।
- स्थानांतरण के बाद चर्चाओं में आए घघौवा चौकी प्रभारी पंकज त्यागी, विदाई से ठीक पहले की गई कार्रवाई को लोग मान रहे हैं महज ‘खानापूर्ति’।
- पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की उठी जोरदार मांग; सरकारी भूमि के दोहन पर दोषियों की जवाबदेही तय करने की अपील।
छावनी थाना क्षेत्र / बस्ती – जनपद के घघौवा चौकी क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन को लेकर प्रशासनिक सक्रियता के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच का विरोधाभास अब खुलकर सामने आ गया है। क्षेत्र में महीनों से चल रहे बेखौफ खनन के खेल पर जब सवाल उठे, तो पुलिस और प्रशासन ने वाहवाही लूटने के लिए एक ट्राली मिट्टी सीज कर अपनी पीठ थपथपा ली। लेकिन, इस इकहरे एक्शन ने महकमे के दावों की कलई खोल दी है और कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घघौवा चौकी क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन पर पुलिस की एक ट्रॉली सीज करने की कार्रवाई ने खुद पुलिस के दावों की पोल खोल दी है। सवाल यह नहीं है कि कार्रवाई हुई, सवाल यह है कि कार्रवाई तब क्यों हुई जब सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी पहले ही निकाली जा चुकी थी।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि महीनों से घघौवा और रिधौरा क्षेत्र में बेखौफ मिट्टी खनन चल रहा है। दिन-रात जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चलती रहीं, लेकिन जिम्मेदार आंख मूंदे रहे। जिले में यह कोई नई बात नहीं है – आरोप है कि यह गतिविधि खनन अधिकारी और स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत से संचालित हो रही है और बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
सुलगते सवाल और गंभीर आरोप
- कार्रवाई में इतनी देर क्यों? स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि घघौवा क्षेत्र में महीनों से अवैध मिट्टी खनन का खेल बदस्तूर जारी था। जब मूकदर्शक बनी पुलिस को अवैध कारोबार की भनक थी, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- सरकारी संपत्ति पर डाका: रिधौरा के सरकारी तालाब से माफियाओं द्वारा सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी निकाले जाने की चर्चा आम है। सवाल यह है कि क्या सरकारी संपत्तियों की रक्षा करने की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- एक ट्राली पर एक्शन, बाकी पर पर्दा: जब सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी का अवैध खनन और परिवहन हुआ, तो सिर्फ एक ट्रॉली सीज करके पूरे प्रकरण को रफा-दफा करने की कोशिश क्यों की जा रही है? क्या यह बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध कारोबार को छिपाने का प्रयास है?
रिधौरा का सरकारी तालाब – सबसे बड़ा सबूत
ग्रामीणों के अनुसार सबसे बड़ा घाव रिधौरा के सरकारी तालाब पर किया गया है। आरोप है कि सरकारी अभिलेख में दर्ज तालाब से सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी माफिया निकाल ले गए। यह सिर्फ मिट्टी की चोरी नहीं, सरकारी भूमि का दोहन, राजस्व की लूट और पर्यावरणीय अपराध है।
नियम स्पष्ट है – बिना अनुमति खनन करना, सरकारी राजस्व को क्षति पहुँचाना तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्राली को सीज कर कड़ा जुर्माना और न्यायिक कार्यवाही होनी चाहिए।
फिर घघौवा में यह नियम महीनों तक क्यों नहीं लागू हुआ?
कार्रवाई पर ही सवाल
सूत्र बताते हैं कि जब मामला मीडिया और उच्चाधिकारियों की नजर में आया तो आनन-फानन में एक ट्रॉली सीज दिखा कर वाहवाही लूटने की कोशिश की गई। जिले में पहले भी ऐसा ही पैटर्न रहा है – कहीं चार ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज की खबर आती है, तो कहीं रात भर खनन जारी रहने की बात सामने आती है।
ग्रामीण पूछ रहे हैं:
- यदि खनन अवैध था तो पहले क्यों नहीं रोका गया?
- रिधौरा तालाब से निकली सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी की रॉयल्टी कहां है? परमिट कहां है?
- जिले में एसडीएम, सीओ और थाना प्रभारियों को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है फिर भी रात-रात भर खनन कैसे हुआ?
- घघौवा चौकी प्रभारी पंकज त्यागी के ट्रांसफर के बाद ही यह मामला ज्यादा चर्चा में क्यों आया?
अब दिखावा नहीं, जांच चाहिए
यह मामला एक ट्रॉली का नहीं, पूरे नेटवर्क का है। प्रशासन से हमारी मांग है:
- उच्चस्तरीय जांच: पूरे प्रकरण की जांच खनन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम से कराई जाए। सैटेलाइट इमेज और तालाब की पैमाइश से पता चलेगा कि कितनी मिट्टी निकली।
- रिकॉर्ड की जांच: पिछले 6 महीनों में छावनी क्षेत्र में कितनी रॉयल्टी जमा हुई, कितने परमिट जारी हुए, इसकी सार्वजनिक जांच हो।
- जिम्मेदारी तय हो: यदि सरकारी तालाब का दोहन हुआ है तो इसमें शामिल हर व्यक्ति – माफिया से लेकर संरक्षण देने वाले तक – पर समान कानून लागू हो।
चौकी प्रभारी का ट्रांसफर और बढ़ती चर्चाएं
चर्चाओं के केंद्र में रहे घघौवा चौकी प्रभारी पंकज त्यागी के ट्रांसफर के बाद यह मामला तूल पकड़ गया है। विदाई की बेला में या तबादले के ठीक बाद इस तरह की ‘दिखावे की कार्रवाई’ ने स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोग दबी जुबान से पूछ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई किसी सोची-समझी रणनीति के तहत सिर्फ दाग धोने के लिए की गई है?
उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही की मांग
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक चौकी या एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा नेटवर्क सक्रिय रहा है। जनता की मांगें स्पष्ट हैं:
- उच्चस्तरीय जांच: घघौवा क्षेत्र में हुए अवैध खनन के पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- जिम्मेदारी तय हो: यदि सरकारी भूमि और तालाबों का दोहन हुआ है, तो इसकी आड़ में संरक्षण देने वाले जिम्मेदारों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- सख्त शिकंजा: कार्रवाई केवल दिखावे की न हो, बल्कि इस अवैध नेटवर्क में शामिल हर छोटे-बड़े चेहरे पर समान रूप से कानून का शिकंजा कसा जाए।
- रिकॉर्ड और रॉयल्टी की जांच: जिला प्रशासन खनन स्थलों, पिछले महीनों के रिकॉर्ड और रॉयल्टी की पारदर्शी जांच करे ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में महज औपचारिकता निभाते हैं या वास्तव में दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई कर मिसाल पेश करते हैं। सच्चाई क्या है, यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन घघौवा का यह प्रकरण सिस्टम की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गया है।
जिले में अवैध खनन पर शिकंजे के दावे तो बहुत हुए, लेकिन जमीनी हकीकत वही है – रात में अवैध खनन का खेल, दिन में धूल और हादसों का खतरा। घघौवा का मामला इसी का ताजा उदाहरण है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर हैं। क्या कार्रवाई सिर्फ एक ट्रॉली तक सीमित रहेगी, या सैकड़ों ट्रॉली के इस लूट का पूरा हिसाब सामने आएगा?














