उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती में भीषण सड़क हादसा: नगर थाना क्षेत्र के गोटवा के पास बसहवा ब्रिज पर कार और मोटरसाइकिल की आमने-सामने जबरदस्त टक्कर।

दो युवकों की दर्दनाक मौत: हादसे में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पांडेय के इकलौते पुत्र शिवांश पांडेय और संदीप प्रजापति (पिलखाव, कप्तानगंज) की मौके पर ही मौत।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती की खून से सनी सड़कें: सिस्टम की बेपरवाही और उजड़ते परिवार

  • एक युवक गंभीर रूप से घायल: हादसे में तिनपेडिया गांव निवासी चंद्र भूषण मिश्र गंभीर रूप से घायल, लखनऊ के मेदांता अस्पताल में जारी है इलाज।
  • परिजनों में कोहराम: आधी रात को घटी इस घटना के बाद से मृतकों के घरों में छाया मातम, पूरे इलाके में शोक की लहर।
  • पुलिस कार्रवाई: सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच में जुटी।

​बस्ती जिले के नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोटवा के पास बसहवा ब्रिज पर 29 और 30 जुलाई की मध्यरात्रि हुआ भीषण सड़क हादसा कोई इकलौता दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी लचर यातायात व्यवस्था और बेलगाम रफ्तार का एक और वीभत्स चेहरा है। इस दर्दनाक हादसे में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पांडेय के इकलौते बेटे शिवांश पांडेय और संदीप प्रजापति की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सड़क पर जरा सी लापरवाही पलभर में हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए मातम में बदल सकती है।

जानकारी मिली है कि बसहवा पुल के पास कोई बाइक सवार घायलावस्था में पड़ा था, वह अचानक दिखा तो कार दाहिने काटकर वह आगे निकलना चाहे, ठीक उसी समय तेज गति से आ रहे, ट्रक की चपेट में आ गये। घटना के बाद कार में आग भी लग गई। शिवांश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनके मामा का लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रिफर किया गया है। ज्ञानेन्द्र पांडेय बेहद व्यवहार कुशल हैं। बेटे की आकस्मिक मौत से पूरा परिवार, सगे सम्बन्धी स्तब्ध हैं। कांग्रेस पार्टी में भी शोक व्याप्त हो गया है।

पुलिस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार रात्रि 12ः15 पर बसहवा फ्लाई ओवर के पास बस्ती से अयोध्या मार्ग पर दो पहिया वाहन व चार पहिया वाहन में टक्कर हो गया। घटना में बाइक यूपी बीजे 3632 सवार दो लोग घायल हो गये जबकि कार संख्या यूपी 51 बीजेड 8319 सवार शिवांश पांडेय निवासी पिकौरा बक्श की मौके पर ही मौत हो गई और तपिश मिश्रा पुत्र भूषण कुमार मिश्रा सा0 तपसी धाम को काफी चोट आई है। उन्हे लखनऊ रिफर किया गया है। सूचना पर तत्काल चौकी प्रभारी फुटहिया ने घायलों को चिकित्सालय पहुंचाया और शव को कब्जे में लेकर विधिक कार्यवाही शुरू की। दो पहिया चालक संदीप कुमार प्रजापति पुत्र राम उजागर प्रजापति व संदीप कुमार प्रजापति को चिकित्सालय ले जाया गया जहां संदीप कुमार प्रजापति की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।

घटना की जानकारी देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक श्याम कांत ने बताया कि बसहवा फ्लाई ओवर के पास बस्ती से अयोध्या मार्ग पर दो पहिया वाहन व चार पहिया वाहन में टक्कर हो गया जहां सूचना पर तत्काल चौकी प्रभारी फूटहिया मय हमराह कर्मचारी गढ़ व सीसी टीम प्रभारी पहुंचकर दो पहिया चालक संदीप कुमार प्रजापति पुत्र राम उजागर प्रजापति ग्राम पिलखाए थाना कप्तानगंज जनपद बस्ती उम्र 22 वर्ष वाहन संख्या UP51BJ3632 व चार पहिया वाहन संख्या UP51BZ8319 हर्ष गुप्ता नीरज कुमार गुप्ता जिसमें घायल शिवांश पांडे पुत्र ज्ञानेंद्र पांडे ग्राम उम्र 28 वर्ष ग्राम पिकौरा बक्श थाना कोतवाली बस्ती तथा तपिश मिश्रा पुत्र भूषण कुमार मिश्रा सा0 तपसी धाम को काफी चोट आई है जिन्हें तत्काल एंबुलेंस द्वारा इलाज हेतु जिला अस्पताल बस्ती भिजवाया गया था जिसमें शिवांश पांडे व संदीप कुमार प्रजापति का इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी तथा तपीश कुमार मिश्रा को इलाज हेतु रेफर कर दिया गया हैं अन्य आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।

​क्या यही है हमारी यातायात सुरक्षा?

​यह सवाल हर संवेदनशील नागरिक के जेहन में उठना लाजिमी है कि आखिर कब तक नेशनल हाइवे और बाईपास मौत के ऐसे ही अखाड़े बने रहेंगे? प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार और मोटरसाइकिल की यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दो युवकों की सांसें मौके पर ही थम गईं, जबकि तीसरे युवक चंद्र भूषण मिश्र जिंदगी और मौत के बीच लखनऊ के मेदांता अस्पताल में जंग लड़ रहे हैं।

  • जिम्मेदारों की खामोशी: हाईवे और मुख्य मार्गों पर ओवरस्पीडिंग और गलत दिशा में वाहन चलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आखिर यातायात पुलिस और प्रशासन तब तक गहरी नींद में सोता रहता है जब तक सड़क पर लाशें नहीं बिछ जातीं?
  • व्यवस्था पर सवाल: स्ट्रीट लाइटों की कमी, तीखे मोड़ और रास्तों पर सुरक्षा मानकों का अभाव आए दिन ऐसे हादसों को न्योता दे रहा है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में रहता है?

​उजड़ गया इकलौता चिराग

​एक पिता के लिए अपने इकलौते बेटे की अर्थी उठाने से बड़ा कोई वज्रपात नहीं हो सकता। शिवांश पांडेय की मौत ने न सिर्फ एक परिवार का इकलौता चिराग बुझा दिया, बल्कि समाज के उन तमाम लोगों को भी झकझोर दिया है जो इस दर्दनाक सच से आंखें मूंदे बैठे रहते हैं। संदीप प्रजापति के घर का भी रो-रोकर बुरा हाल है।

​अब कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे

​पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर अपनी औपचारिकता तो पूरी कर ली है, लेकिन क्या महज खानापूरी से इन परिवारों के आंसू सूख जाएंगे?

​अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग नींद से जागे:

  1. सख्त निगरानी: रात के समय तेज रफ्तार वाहनों और स्टंटबाजी करने वालों पर शिकंजा कसा जाए।
  2. दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) की पहचान: बसहवा ब्रिज और गोटवा के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी अन्य मां की गोद सूनी न हो।

सड़कें आवागमन के लिए हैं, मौत का रास्ता नहीं। अगर अब भी सबक नहीं सीखा गया, तो बस्तियों के ये रास्ते यूं ही खून से लाल होते रहेंगे और सिस्टम कागजी बहसों में उलझा रहेगा।

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