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वट फाउंडेशन ने किया यशस्वी शिक्षक और वरिष्ठ पत्रकार गोपाल गोयल को किया सम्मानित

वटवृक्ष बनकर मार्गदर्शन और समाज को छांव प्रदान करते हैं हमारे बुजुर्ग रचना

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बांदा / बुन्देलखंड के वट फाउंडेशन का “वरिष्ठ रत्न सम्मान समारोह” शहर के एक मैरिज हाल में धूमधाम से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार चंद्रिका प्रसाद दीक्षित मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छाया सिंह ने की। कार्यक्रम की शुरुआत स्वाती गुप्ता ने अपने मधुर स्वर मे सरस्वती वंदना से की।

समारोह के दौरान शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए जिले के यशस्वी शिक्षक और वरिष्ठ पत्रकार गोपाल गोयल को सम्मानित किया गया। साथ ही, राजस्थान की पारंपरिक कला ‘अलगोजा’ को बांदा में पहचान दिलाने वाले कलाकार मुन्नीलाल राजपूत को भी सम्मानित किया गया। दोनों को वट फाउंडेशन की निदेशक डॉ. रचना गुप्ता, अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, उपाध्यक्ष राघवेंद्र गुप्ता और संरक्षिका आशा गुप्ता ने शील्ड प्रदान की।

फाउंडेशन की निदेशक डॉ. रचना गुप्ता ने अपने संबोधन में वृद्धजनों को समाज का वटवृक्ष बताते हुए कहा कि ये हमारे समाज को छांव और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जो पीढ़ी अपने बुजुर्गों का सम्मान करेगी, उसे भविष्य में वही आदर और सम्मान प्राप्त होगा। मुख्य अतिथि चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने गोपाल गोयल के हिंदी साहित्य में दिए गए योगदान की प्रशंसा की। कार्यक्रम मे पधारे रमेश पाल ने पारंपरिक वाद्य यंत्र अलगोजा पर विस्तार से जानकारी दी।

इस भव्य आयोजन में स्मृति गुप्ता, डॉक्टर धीरेंद्र यादव, श्रवण कुमार, नंदिनी गुप्ता, लोकेंद्र सिंह, सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बांदा / बुन्देलखंड के वट फाउंडेशन का “वरिष्ठ रत्न सम्मान समारोह” शहर के एक मैरिज हाल में धूमधाम से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार चंद्रिका प्रसाद दीक्षित मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छाया सिंह ने की। कार्यक्रम की शुरुआत स्वाती गुप्ता ने अपने मधुर स्वर मे सरस्वती वंदना से की।

समारोह के दौरान शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए जिले के यशस्वी शिक्षक और वरिष्ठ पत्रकार गोपाल गोयल को सम्मानित किया गया। साथ ही, राजस्थान की पारंपरिक कला ‘अलगोजा’ को बांदा में पहचान दिलाने वाले कलाकार मुन्नीलाल राजपूत को भी सम्मानित किया गया। दोनों को वट फाउंडेशन की निदेशक डॉ. रचना गुप्ता, अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, उपाध्यक्ष राघवेंद्र गुप्ता और संरक्षिका आशा गुप्ता ने शील्ड प्रदान की।

फाउंडेशन की निदेशक डॉ. रचना गुप्ता ने अपने संबोधन में वृद्धजनों को समाज का वटवृक्ष बताते हुए कहा कि ये हमारे समाज को छांव और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जो पीढ़ी अपने बुजुर्गों का सम्मान करेगी, उसे भविष्य में वही आदर और सम्मान प्राप्त होगा। मुख्य अतिथि चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने गोपाल गोयल के हिंदी साहित्य में दिए गए योगदान की प्रशंसा की। कार्यक्रम मे पधारे रमेश पाल ने पारंपरिक वाद्य यंत्र अलगोजा पर विस्तार से जानकारी दी।

इस भव्य आयोजन में स्मृति गुप्ता, डॉक्टर धीरेंद्र यादव, श्रवण कुमार, नंदिनी गुप्ता, लोकेंद्र सिंह, सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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