
पुलिस से नहीं मिला न्याय, तो कोर्ट का सहारा – बिजनौर के पीड़ित ने उठाई आवाज
बिजनौर, – उत्तर प्रदेश में न्याय की तलाश में भटकते एक पीड़ित ने जब पुलिस से कोई राहत नहीं मिली, तो अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। बिजनौर जिले के चांदपुर कोतवाली क्षेत्र का यह मामला पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित के अनुसार, उसके ताऊ के साथ मिलीभगत कर एक दरोगा ने उस पर झूठा धारा 307 (हत्या के प्रयास) का मुकदमा दर्ज कर दिया। इस फर्जी मुकदमे से राहत पाने के लिए जब उसने पुलिस अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई, तो मुकदमा खत्म करने के एवज में 3 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई।
SP-DIG से भी नहीं मिला इंसाफ
पीड़ित ने इस मामले की शिकायत बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP) और पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) से भी की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब हर दरवाजा खटखटाने के बावजूद न्याय नहीं मिला, तो पीड़ित ने मजबूर होकर कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस मामले ने बिजनौर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुलिस रसूखदारों के इशारे पर काम कर रही है और पीड़ित को झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
सोशल मीडिया पर उठी कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद #JusticeForVictim और #BijnorPolice ट्रेंड करने लगे हैं। ट्विटर पर कई लोग उत्तर प्रदेश पुलिस, डीजीपी और मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग कर न्याय की मांग कर रहे हैं।
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