
सिद्धार्थनगर में पवित्र माह रमजान का आगाज हो चुका है। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। मस्जिदों में साफ-सफाई का काम चल रहा है। मुख्यालय और तहसील क्षेत्र के बाजारों में रोजा इफ्तार के लिए फल, खजूर और सेवई की दुकानें सज गई हैं। लोग इफ्तार की तैयारी के लिए सामान खरीदने लगे हैं।
शिया जामा मस्जिद हल्लौर के पेश इमाम मौलाना शाहकारजैदी ने रमजान के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि रोजा अच्छी जिंदगी जीने का प्रशिक्षण है। रोजेदार की अंतरात्मा उसे नेक इंसान बनने के लिए अच्छे संस्कार सिखाती है। रोजे का मुख्य उद्देश्य सिर्फ भूख-प्यास पर काबू पाना नहीं है। यह आत्म-संयम, अल्लाह के प्रति समर्पण और सही राह पर चलने का संकल्प है।
मौलाना ने बताया कि इंसान 11 महीने दुनियावी कामों में व्यस्त रहता है। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। यह इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। वे पूरी श्रद्धा से अल्लाह की इबादत करते हैं।
इस्लामी मान्यता के अनुसार, रोजा रखने से लोग अल्लाह के करीब पहुंचते हैं। वे दूसरों के दुख को समझते हैं। रोजेदार सुबह सेहरी करते हैं और शाम को इफ्तार से रोजा खोलते हैं। लोग इस पवित्र महीने का पूरे साल इंतजार करते हैं।
