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एक राष्ट्र एक चुनाव विषय पर राष्ट्र व्यापी विचारधारा परामर्श सम्मेलन आयोजित

सागर। वंदे भारत लाईव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी,8225072664- दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में निरंतर चलने वाली चुनावी प्रक्रिया की जगह एक राष्ट्र एक चुनाव का विचार न केवल भारत के चुनावी तंत्र में सुधार का प्रयास है बल्कि यह देश को समृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम बनाता है। एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा भारत में नयी नहीं है। संविधान को अंगीकार किए जाने के बाद, 1951 से 1967 तक लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ आयोजित किए गए थे। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के पहले आम चुनाव 1951-52 में एक साथ आयोजित किए गए थे। यह परंपरा इसके बाद 1957, 1962 और 1967 के तीन आम चुनावों के लिए भी जारी रही। भारत में 1967 तक संसद और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव होते थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक फैसले ने एक राष्ट्र एक चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया। कांग्रेस ने अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग करके राज्य विधानसभाओं को बर्खास्त कर दिया था और एक राष्ट्र एक चुनाव परंपरा को बदल दिया। उक्त उदगार नरयावली विधायक इंजी. प्रदीप लारिया ने एक राष्ट्र एक चुनाव, विकसित भारत की दिशा में एक कदम प्रबुद्धजन सम्मेलन में शासकीय महाविद्यालय मकरोनिया के सभागार में व्यक्त किये।
विधायक लारिया ने आगे कहा कि यह बार-बार होने वाला चुनाव देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। यह जनकल्याणकारी योजनाओं को रोकता है। विभिन्न चुनावों से आचार संहिता अवधि में विकास की सारी योजनाएं रुक जाती हैं। आज जब भारत विकसित देशों की पंक्ति में खड़ा हुआ है, तब ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि विकास की क्रमिक निरंतरता को बनाए रखने, शासन को सुव्यवस्थित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को उसके अनुकूल बनाने के प्रयासों को अमलीजामा पहनाया जाए। अब समय आ गया है और जनता भी चाहती है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हो ताकि सभी राजनीतिक दल देश के विकास और जनता के कल्याण के लिए काम कर सके।
एक राष्ट्र, एक चुनाव पर भाजपा की पहल निश्चित रूप से जनहित में है। भाजपा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। एक देश एक चुनाव से देश को कोई फायदे होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल है कि देश में एक समान चुनाव प्रणाली हो। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर धूप दीप एवं माल्यार्पण कर हुआ।कार्यक्रम को मुख्य वक्ता अरविंद जैन, सेवानिवृत्ति प्राध्यापक एवं महेश दत्त त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य सृजन मंच ने सम्मेलन को संबोधित किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण ए.के.जैन, प्राचार्य,शासकीय महाविद्यालय मकरोनिया, मंच संचालन राम प्रजापति एवं आभार धर्मेंद्र राठौर, अध्यक्ष जन भागीदारी समिति ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में समाजसेवी गुलझारीलाल जैन, मंडल अध्यक्ष, नपाध्यक्ष मिहीलाल, पार्षदगण,भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्तागण, समाजसेवी, धार्मिक संगठन, मातृशक्ति एवं विभिन्न समाजों के प्रबुद्धजनों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

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