

🚨 सहारनपुर जिला अस्पताल चौक पर अवैध अतिक्रमण और बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था ने बिगाड़ा हाल, जाम में फंसी एम्बुलेंस और अधिकारियों की गाड़ियां 🚨
सहारनपुर। शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में से एक जिला अस्पताल चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। सड़क पर फैला अवैध अतिक्रमण, फुटपाथों पर कब्जा जमाए दुकानदार, चारों दिशाओं में बेतरतीब खड़े वाहन और ट्रैफिक पुलिस की उदासीनता ने मिलकर आमजन के लिए इस चौक को एक यातना स्थल बना दिया है। हालात इतने बदतर हो गए कि आए दिन चौक पर भारी जाम लगना आम बात हो गई है और इस जाम में कई बार एम्बुलेंस व प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां तक फंस जाती हैं। शनिवार को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब घंटों तक जाम में फंसी एम्बुलेंस के सायरन की आवाज लोगों की बेबसी बयान कर रही थी, लेकिन आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं था। चौक के चारों ओर से आने वाले वाहनों की लंबी कतारें जाम में फंसी रहीं और यात्री परेशान होते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसे स्थान पर यह स्थिति किसी बड़ी दुर्घटना और मरीजों की जान जाने की वजह बन सकती है। दरअसल, चौक के किनारे लगने वाले ठेले, रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा और कुछ लोगों द्वारा सड़क किनारे स्थायी रूप से दुकानें जमा लेना इस समस्या की जड़ है। इसके अलावा, सड़कों पर वाहनों की बेतरतीब पार्किंग और ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी ने स्थिति को और भी विकराल बना दिया है। सबसे अहम बात यह है कि यह चौक शहर के प्रमुख अस्पताल से सटा हुआ है, जहाँ हर रोज हजारों लोग इलाज के लिए आते हैं। मरीजों को अस्पताल पहुँचने में देर होना सीधे-सीधे उनकी जान के साथ खिलवाड़ है। कई बार एम्बुलेंस चालक और मरीजों के परिजन अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं कि इस क्षेत्र को अतिक्रमणमुक्त किया जाए, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय व्यापारियों का भी कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और राजनीतिक दबाव की वजह से अवैध कब्जाधारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों का गुस्सा इस बात पर है कि जहाँ सरकार स्मार्ट सिटी और सुगम यातायात के नाम पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं जिला अस्पताल चौक जैसे संवेदनशील क्षेत्र की सुध लेने वाला कोई नहीं है। शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण हटाकर चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे। प्रशासन के लिए यह एक गंभीर चुनौती है क्योंकि एक तरफ यह चौक शहर का प्रमुख मार्ग है, दूसरी ओर यह अस्पताल और सरकारी दफ्तरों से भी जुड़ा हुआ है, जहाँ हर समय आमजन, अधिकारी और मरीजों की भीड़ रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चौक पर नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो, अवैध अतिक्रमण को हटाकर सख्त कार्रवाई की जाए और पार्किंग की उचित व्यवस्था बनाई जाए तो इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि सड़क पर अवैध अतिक्रमण जिंदाबाद के नारों के बीच आम जनता की परेशानी और मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है, लेकिन प्रशासन अब भी कागजी कार्रवाई तक ही सीमित है। सवाल यही है कि आखिर जिला अस्पताल चौक कब तक जाम और अराजकता का शिकार रहेगा और कब इस समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा?
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़, समृद्ध भारत समाचार पत्र
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