
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्ट

ललितपुर। बहुचर्चित एलयूसीसी (LUCC) फाइनेंस कंपनी से जुड़े करोड़ों के घोटाले में जेल में बंद मुख्य संचालक को सोमवार को बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद आरोपी को निजी मुचलके पर जमानत दे दी। आरोपी लगभग एक वर्ष से लगातार न्यायिक हिरासत में था।
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कंपनी पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित आठ राज्यों में सक्रिय एलयूसीसी नामक फाइनेंस कंपनी पर निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है। कंपनी के अधिकारियों ने उच्च ब्याज का झांसा देकर हजारों लोगों से भारी रकम जमा कराई थी।
जांच में सामने आया कि कंपनी के प्रमुख संचालक और अन्य पदाधिकारी निवेशकों का पैसा लेकर गायब हो गए थे। जब लोगों ने पैसा वापस मांगना शुरू किया, तो कंपनी ने भुगतान टालना शुरू किया और बाद में कार्यालय बंद पाए गए।
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35 अरब रुपये से अधिक का घोटाला, संपत्ति तक कुर्क
राज्य स्तरीय जांच में यह बात सामने आई कि कंपनी ने लगभग 35 अरब रुपये का आर्थिक गबन किया है। जांच के बाद पुलिस व प्रशासन ने आरोपी की कई चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया।
कुर्क की गई संपत्तियों में—
करोड़ों रुपये के बैंक खाते
कई आलीशान मकान
दर्जनों महंगी गाड़ियाँ, जिनमें मर्सिडीज, जैगुआर और हुंडई अल्काज़ा जैसी लग्जरी कारें शामिल
कई जिलों में स्थित प्रॉपर्टी
इसके अलावा कंपनी से जुड़े कई वित्तीय दस्तावेज, अनुबंध और खातों की पुस्तिकाएँ भी जब्त की गई थीं।
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कई अधिकारी बने सह-अभियुक्त
पुलिस जांच में कंपनी के अन्य अधिकारी भी घोटाले में शामिल पाए गए। सह-आरोपी के रूप में—
विजय सिंह
अतुल जैन
सुंदर सिंह
अमित जैन
आदि को भी नामजद किया गया है। सभी पर समान धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना जारी है।
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अदालत में सुनवाई : बचाव पक्ष ने क्या कहा
सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में जमानत पर बहस हुई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि—
आरोपी को झूठे आरोपों में फंसाया गया है,
उसके खिलाफ सीधे धन हड़पने के ठोस साक्ष्य नहीं हैं,
आरोपी जांच में सहयोग करता रहा है,
लंबे समय तक हिरासत में रखने का औचित्य नहीं है।
इसके साथ ही आरोपी द्वारा कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और जांच एजेंसियों से सहयोग करने की दलील भी दी गई।
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अभियोजन पक्ष के तर्क
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने कहा कि—
आरोपी के खिलाफ भारी वित्तीय अनियमितताओं के पुख्ता साक्ष्य हैं,
वह कंपनी का मुख्य संचालक और निर्णयकर्ता था,
उसकी रिहाई से साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका है।
हालांकि, कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जमानत स्वीकृत कर दी।
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कोर्ट का फैसला
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आदेश में कहा कि आरोपी की लंबी अवधि की हिरासत, विवेचना की स्थिति और प्रस्तुत दस्तावेजों को देखते हुए उसे निजी मुचलके पर जमानत दी जाती है।
इसके बाद जेल प्रशासन ने आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी होने पर आरोपी को रिहा कर दिया।
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निवेशकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
कंपनी में निवेश करने वाले हजारों लोग अभी भी अपनी जमा धनराशि वापस न मिलने से परेशान हैं।
कुछ निवेशकों ने चिंता जताई कि मुख्य संचालक की रिहाई से उन्हें पैसा वापस मिलने की प्रक्रिया और लंबी न हो जाए।
वहीं, कुछ ने उम्मीद जताई कि आरोपी बाहर आकर मामले के समाधान में तेजी लाएगा।
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जांच अभी जारी, कई बिंदुओं पर पुलिस की नजर
पुलिस अभी भी यह पता कर रही है कि—
निवेशकों से वसूला गया पैसा कहां-कहां खर्च हुआ,
किन-किन खातों में रकम स्थानांतरित की गई,
किस प्रकार की निवेश योजनाओं का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित किया गया था।
अगले चरण में पुलिस सभी सह-आरोपियों से पूछताछ कर वित्तीय लेन-देन की पूरी चेन को उजागर करेगी।







