।। डिजिटल’ बहाना, जनता को तड़पाना: युग कृष्णा गैस एजेंसी की मनमानी से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।।
।। हक की गैस पर 'अपनों' का कब्जा! बढ़नी ब्लॉक में इंडेन गैस एजेंसी की धांधली के खिलाफ सड़क पर उतरे उपभोक्ता।।
।। युग कृष्णा गैस एजेंसी पर ‘अंधेरगर्दी’: चिलचिलाती धूप में घंटों तपे उपभोक्ता, फिर भी थमा दिया खाली हाथ।।
उत्तर प्रदेश।
सिद्धार्थनगर (अजीत मिश्रा – खोजी): बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के भारोली स्थित युग कृष्णा इंडेन गैस एजेंसी इन दिनों अव्यवस्था और मनमानी का केंद्र बन गई है। गुरुवार को एजेंसी पर उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब सुबह 6 बजे से लाइन में लगे दर्जनों उपभोक्ताओं को कर्मचारियों ने गैस देने से साफ मना कर दिया। प्रशासन की नाक के नीचे चल रही इस धांधली ने ग्रामीण जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
💫OTP का ‘खेल’ और चहेतों पर मेहरबानी
ग्रामीणों का आरोप है कि एजेंसी में खुलेआम भाई-भतीजावाद और धांधली चल रही है। दूर-दराज के गांवों से आए उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने 10 तारीख को सिलेंडर बुक कराया था, जिसके बाद उन्हें 12 तारीख को बुलाया गया। लेकिन जब वितरण की बारी आई, तो कर्मचारियों ने ‘ओटीपी (OTP) नहीं आ रहा’ का घिसा-पिटा बहाना बनाकर पात्र लोगों को भगाना शुरू कर दिया। आरोप है कि एक तरफ आम जनता को तकनीक का हवाला देकर लौटाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बैकडोर से चहेतों को सिलेंडर बांटे जा रहे हैं।
💫धूप में झुलसी उम्मीदें, आक्रोश में ग्रामीण
मार्च की चिलचिलाती धूप में सुबह 6 बजे से कतारबद्ध महिलाओं और बुजुर्गों का आक्रोश तब फूट पड़ा जब घंटों इंतजार के बाद उन्हें खाली हाथ लौटने को कहा गया। उपभोक्ताओं का कहना है कि:
🔥समय पर बुकिंग होने के बावजूद वितरण में मनमानी की जा रही है।
🔥एजेंसी कर्मचारी उपभोक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं।
🔥नियमों को ताक पर रखकर गैस की कालाबाजारी की जा रही है।
“हम गरीब लोग काम-धंधा छोड़कर सुबह से लाइन में लगे हैं। अब कह रहे हैं कि ओटीपी नहीं आ रहा। क्या डिजिटल इंडिया का मतलब गरीबों को परेशान करना है?” — एक आक्रोशित उपभोक्ता
💫प्रशासनिक दखल की दरकार
युग कृष्णा इंडेन गैस एजेंसी की इस कार्यप्रणाली से पूरे बढ़नी ब्लॉक में भारी नाराजगी है। परेशान ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और खाद्य एवं रसद विभाग से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर एजेंसी संचालक आम जनता के हक पर डाका डाल रहे हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं या फिर शिकायतों को नजरअंदाज करना ही उनकी नियति बन गई है?















