सिलेंडर गायब, पोर्टल पर डिलीवरी ‘फुल’: विक्रमजोत में गैस एजेंसी का बड़ा खेल! गरीब का चूल्हा खाली, कागजों में गैस की होली: सरोज इंडेन गैस एजेंसी के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश।
डिजिटल डाका: बिना बुकिंग मोबाइल पर आया डिलीवरी का मैसेज, उपभोक्ता हैरान। हवा में बंट रहे सिलेंडर: विक्रमजोत में गैस कालाबाजारी का 'नया मॉडल' उजागर।
।। सिस्टम की आंखों में झोंकी जा रही धूल: विक्रमजोत में ‘हवा’ में हो रही गैस की डिलीवरी ।।
🙈विक्रमजोत गैस घोटाला: क्या कागजी डिलीवरी के पीछे छिपा है करोड़ों का वारा-न्यारा?
🙈बस्ती का ‘गैस कांड’: सिलेंडर मिला नहीं, रसीद कट गई!
🙈सावधान! आपकी गैस कोई और डकार रहा है।
🙈इंडेन गैस एजेंसी की मनमानी: सिस्टम हैक या नीयत में खोट?
बस्ती।। जनपद के विक्रमजोत ब्लॉक में घरेलू गैस उपभोक्ताओं के साथ जो खेल खेला जा रहा है, वह न केवल डिजिटल इंडिया के दावों पर तमाचा है, बल्कि सीधे तौर पर गरीबों के निवाले पर डाका है। ‘सरोज इंडेन गैस एजेंसी’ पर लग रहे आरोपों ने यह साफ कर दिया है कि गैस की कालाबाजारी का नेटवर्क कितना गहरा है। यहाँ उपभोक्ताओं को गैस का सिलेंडर तो नहीं मिल रहा, लेकिन उनके मोबाइल पर ‘डिलीवरी सक्सेसफुल’ के मैसेज जरूर टपक रहे हैं।
💫कागजों पर ‘उज्ज्वला’, हकीकत में अंधेरा
एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए छावनी कस्बे के गौरीशंकर सोनी और नटौवा के चंद्रभूषण तिवारी जैसे दर्जनों उपभोक्ताओं ने जो दास्तान सुनाई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। बिना बुकिंग किए ही सिस्टम में डिलीवरी दिखा दी गई। जब उपभोक्ता एजेंसी पहुंच रहे हैं, तो उन्हें बैरंग वापस कर दिया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर उपभोक्ता को गैस नहीं मिली, तो वह सिलेंडर आखिर गया कहाँ? क्या इसे ऊंचे दामों पर ‘ब्लैक’ में बेचा जा रहा है?
💫 एजेंसी की मनमानी का कच्चा चिट्ठा
डिजिटल धोखाधड़ी: उपभोक्ताओं के कार्ड पर बिना उनकी जानकारी के ऑनलाइन बुकिंग और डिलीवरी दिखाई जा रही है।
🔥शिकायत का अंबार: सिरावली वैश्य के राजकुमार प्रजापति और पचवस के अमित सिंह जैसे कई उपभोक्ताओं ने एजेंसी के इस फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज उठाई है।
🔥प्रशासनिक सुस्ती: आपूर्ति निरीक्षक हरैया, मधु सिंह का यह कहना कि ‘शिकायत नहीं मिली है’, विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या प्रशासन किसी बड़े हंगामे का इंतजार कर रहा है?
💫ब्लैक मार्केटिंग का नया पैंतरा
हैरानी की बात यह है कि एजेंसी मालिक अभिषेक सिंह इन आरोपों को ‘निराधार’ बताकर सारा दोष स्थानीय दुकानदारों पर मढ़ रहे हैं। लेकिन रिकॉर्ड झूठ नहीं बोलते। अगर कनेक्शन नंबर 7501128639 और 14565836 पर गैस की डिलीवरी दिखाई गई है और उपभोक्ता के घर चूल्हा खाली है, तो इस विसंगति का जवाब कौन देगा?
हमारा सवाल: क्या जिला प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग इस संगठित लूट की जांच करेगा? या फिर रसूखदार गैस एजेंसियों के आगे आम जनता इसी तरह ठगी जाती रहेगी?
विक्रमजोत की यह घटना केवल एक बानगी है। अगर वक्त रहते इस ‘डिजिटल कालाबाजारी’ पर नकेल नहीं कसी गई, तो सरकार की कल्याणकारी योजनाएं केवल फाइलों तक सिमट कर रह जाएंगी।













