
बेरहम’ वर्मा नर्सिंग होम
सीएमएचओ के आदेश का बहाना बनाया वर्मा नर्सिंग होम में झोलाछाप स्टाफ के भरोसे इलाज
परदेशीपुरा स्थित वर्मा नर्सिंग होम में चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने वाली घिनौनी करतूत सामने आई है। भागीरथपुरा में जन्मदिन के भोज से बीमार गंभीर बीमार दंपति संतोष मोकसुकिया और उनकी पत्नी ममता को सोमवार शाम उनके परिजन इलाज की आस में इस अस्पताल लाए थे, लेकिन डॉक्टर की संवेदनहीनता ने उन्हें बीच सड़क पर बेसहारा छोड़ दिया।
पहले डॉ. दीपिका वर्मा ने मरीजों की हालत देखकर उन्हें भर्ती करने के लिए फाइल बनवाने और पैसे जमा करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन जैसे ही भागीरथपुरा इलाके का नाम सामने आया करीब एक घंटे तक मरणासन्न अवस्था में पड़े दंपति को रिसेप्शन पर कुर्सी पर लावारिसों की तरह बैठाकर तमाशा देखते रहे। उसके बाद उन्हें बिना इलाज के धक्के मारकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। डॉ. दीपिका वर्मा और उनके बेटे अथर्व वर्मा की इस बदसलूकी ने चिकित्सा जगत के माथे पर कलंक लगा दिया है। परिजन के बार-बार मिन्नतें करने और इलाज के लिए मुंह मांगे पैसे देने की बात कहने के बावजूद अथर्व वर्मा अपनी जिद पर अड़ा रहा और मरीजों को एमवाय या अरबिंदो ले जाने को कहा। परिजन ने जब अपनी बेबसी जाहिर करते हुए लिखित में कारण मांगा कि आखिर इलाज क्यों नहीं किया जा रहा तो डॉक्टर और उनके बेटे ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए उन्हें दुत्कार दिया।
अस्पताल के बाहर आक्रोश जताया
गुस्साए परिजन और महिलाओं ने अस्पताल के बाहर आक्रोश जताया और साफ शब्दों में कहा कि यदि डॉक्टर मरीजों के साथ ऐसा खिलवाड़ करते हैं तो ऐसे सफेदपोश लुटेरों की दुकानों पर तुरंत सरकारी ताला लग जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई डॉक्टर किसी मरीज का इलाज उसके रहने के स्थान से होने वाली नफरत के आधार पर तय करेगा? जिस मरणासन्न अवस्था में पति-पत्नी को बिना इलाज के अस्पताल से भगाया गया, वह न केवल कानूनन अपराध है बल्कि सीधे
तौर पर उनकी जान के साथ किया गया जानलेवा षड्यंत्र है।







