अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के ‘किले’ पर गरजा बाबा का बुलडोजर! ब्रिटिश मौलाना के अवैध मदरसे को प्रशासन ने किया जमींदोज; 6 बुलडोजरों ने ढाया भ्रष्टाचार का साम्राज्य
"ब्रिटिश मौलाना के अवैध 'साम्राज्य' पर चला योगी का बुलडोजर: सात समंदर पार बैठा था आका, यहाँ जमींदोज हुआ भ्रष्टाचार का किला!"
अजीत मिश्रा (खोजी)
संतकबीरनगर में ‘ऑपरेशन क्लीन’ – ब्रिटिश मौलाना के अवैध साम्राज्य का अंत
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- “लंदन में मौज, यूपी में अवैध कब्जा: संतकबीरनगर में 6 बुलडोजरों ने ढाया भगोड़े मौलाना का मदरसा, खाकी के पहरे में खाक हुआ गुरूर।”
- “कमिश्नर की कोर्ट से झटका, फिर प्रशासन का कड़ा प्रहार: पीएसी के पहरे में ढहाया गया शमसुल हुदा का अवैध मदरसा।”
- “विदेशी धरती से सिस्टम को लगा रहा था चूना, अब मिट्टी में मिला अवैध ठिकाना: भगोड़े मौलाना के काले कारनामों पर चला पीला पंजा!”
- “ऑपरेशन क्लीन: संतकबीरनगर में अवैध मदरसे का अंत, भारी फोर्स के बीच ढहाया गया अवैध निर्माण।”
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में रविवार का सूरज अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के गठजोड़ के लिए ‘काल’ बनकर उगा। भारी सुरक्षा तामझाम और प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच, चर्चित ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान के अवैध मदरसे पर प्रशासन का बुलडोजर गरजा। सुबह 10 बजे जब आधा दर्जन बुलडोजरों ने एक साथ मदरसे की चारदीवारी पर प्रहार किया, तो यह संदेश साफ हो गया कि कानून के हाथ उन लोगों तक भी पहुँच सकते हैं जो सात समंदर पार बैठकर व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

यह कार्रवाई कोई अचानक की गई गतिविधि नहीं, बल्कि एक लंबी कानूनी लड़ाई का परिणाम है। गांव के ही अब्दुल हकीम की शिकायत पर एसडीएम कोर्ट ने नवंबर 2025 में ही ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया था। राहत की उम्मीद में मदरसा प्रबंधन ने जिलाधिकारी से लेकर बस्ती मंडल के कमिश्नर तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन न्याय के आगे रसूख काम न आया। 25 अप्रैल को कमिश्नर कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के साथ ही इस अवैध ढांचे के अंत की इबारत लिख दी गई थी।
भारी फोर्स के बीच ‘ध्वस्तीकरण’ अभियान
रविवार सुबह खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के इस इलाके में हलचल आम दिनों से अलग थी। पीएसी की दो कंपनियां और भारी संख्या में पुलिस बल ने पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए 30 महिला सिपाहियों सहित करीब 100 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। अपर जिलाधिकारी जयप्रकाश और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह खुद मौके पर कमान संभाले हुए थे। प्रशासन की सख्ती का आलम यह था कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को कार्रवाई स्थल के पास फटकने तक की इजाजत नहीं दी गई।
शिकायत से लेकर बुलडोजर तक: एक लंबी कानूनी लड़ाई
इस कार्रवाई की पटकथा पिछले साल ही लिखी जा चुकी थी। गांव निवासी अब्दुल हकीम ने एसडीएम कोर्ट में मदरसे के अवैध निर्माण के खिलाफ मोर्चा खोला था। लंबी सुनवाई के बाद नवंबर 2025 में एसडीएम कोर्ट ने इसे अवैध पाते हुए 15 दिन के भीतर हटाने का आदेश दिया था।इसके बाद मदरसा प्रबंधन ने कानूनी दांव-पेच का सहारा लेकर कार्रवाई को टालने की भरपूर कोशिश की। मामला पहले जिलाधिकारी और फिर बस्ती मंडल के कमिश्नर की अदालत में पहुँचा। लेकिन, साक्ष्यों और अवैध निर्माण की पुख्ता रिपोर्ट के सामने मदरसा कमेटी की दलीलें टिक न सकीं। 25 अप्रैल को कमिश्नर ने याचिका खारिज कर एसडीएम कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी, जिसके बाद प्रशासन ने अंतिम रिमाइंडर नोटिस जारी कर रविवार को कार्रवाई को अंजाम दिया।
सात समंदर पार से भ्रष्टाचार का खेल
यह मामला सिर्फ ईंट-पत्थर के अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े ‘सिस्टम घोटाले’ का पर्दाफाश करता है। मुख्य आरोपी मौलाना शमसुल हुदा खान 2017 में ही भारत छोड़कर ब्रिटेन जा बसा था। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि देश छोड़ने के बाद भी वह लगभग 10 वर्षों तक आजमगढ़ के एक मदरसे से सरकारी वेतन उठाता रहा। विभागीय साठगांठ का आलम यह था कि उसने विदेश में रहते हुए ही वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) भी ले ली।जब करीब पांच महीने पहले इस वित्तीय अनियमितता की परतें खुलीं, तो अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में हड़कंप मच गया। इस मामले में संलिप्तता पाए जाने पर विभाग के चार बड़े अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।मामला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि देश के संसाधनों की लूट का भी है। मुख्य आरोपी मौलाना शमसुल हुदा खान साल 2017 से ही देश छोड़कर ब्रिटेन में ऐश कर रहा है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि वह लगभग 10 वर्षों तक आजमगढ़ के एक मदरसे से सरकारी वेतन डकारता रहा। अधिकारियों की ‘मेहरबानी’ ऐसी थी कि सात समंदर पार बैठे शख्स को वीआरएस (VRS) तक दे दिया गया।
मौके पर डटा रहा प्रशासनिक अमला
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान उप जिलाधिकारी खलीलाबाद हृदय राम तिवारी, सीओ खलीलाबाद प्रियम राज राजशेखर पांडेय और अधिशाषी अधिकारी अवधेश कुमार समेत प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी टीम अंत तक डटी रही। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई भू-माफियाओं और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के लिए एक चेतावनी है।
मुख्य बिंदु: एक नजर में
- बुलडोजर की संख्या: 06
- सुरक्षा बल: 100 पुलिसकर्मी, 2 कंपनी पीएसी।
- कार्रवाई का कारण: अवैध निर्माण और 25 अप्रैल को कमिश्नर कोर्ट से याचिका खारिज होना।
- बड़ा खुलासा: ब्रिटेन में रहकर 10 साल तक सरकारी खजाने से वेतन लेता रहा मौलाना।
भ्रष्ट अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इस बड़े घोटाले की परतें जब खुलीं, तो अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार अधिकारियों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह साफ संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त सफेदपोश और उनके मददगार अब सलाखों के पीछे होंगे।
सुरक्षा का अभेद्य घेरा:
कार्रवाई के दौरान मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। 30 महिला सिपाहियों समेत 100 पुलिसकर्मी और पीएसी की दो कंपनियां तैनात रहीं। मौके पर अपर जिलाधिकारी जयप्रकाश, एएसपी सुशील कुमार सिंह, एसडीएम हृदय राम तिवारी और सीओ प्रियम राजशेखर पांडेय सहित भारी अमला मौजूद रहा।
प्रशासन की इस आक्रामक कार्रवाई ने इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। इसे योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भ्रष्टाचार और अवैध अतिक्रमण पर अब तक की सबसे बड़ी चोट माना जा रहा है।









