
माता ब्रह्मचारिणी की अराधना कर भक्तों ने मांगा सर्वत्र सिद्धि का आशीर्वाद

उदवंतनगर। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की। इसमें शारीरिक शुद्धता के साथ ही मानसिक पवित्रता का विशेष ख्याल रखा गया। श्रद्धालुओं ने माता को विभिन्न प्रकार के पुष्प खासकर गुड़हल , अपराजिता और हरसिंगार के फूल चढ़ाएं तथा तरह-तरह के नैवेद्य अर्पित किए।साथ ही लक्ष्य प्राप्ति की कामना की।वातावरण दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से गूंजता रहा। मां ब्रह्मचारिणी को ब्रह्म शक्ति का प्रतीक माना गया है। जिनकी आराधना से भक्तों में तप करने की शक्ति बढ़ जाती है। माना जाता है कि इनकी पूजा से श्रद्धालु अपने लक्ष्य को पाने में सफल होते हैं। देवी भागवत महापुराण के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को वर के रूप में पानी के लिए देव ऋषि नारद के कहने पर कठिन तपस्या किया था ।इसी कारण इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।पंडित दिनेश पांडेय ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी हमेशा तप में लीन रहती हैं। जिनमें एक हाथ में अक्षय माला तथा दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। वह गौर वर्ण की हैं। उनका कोई वाहन नहीं है। नवदुर्गा में ब्रह्मचारिणी का स्वरुप मनुष्य के लिए सबसे प्रेरणादाई है। इनकी भक्ति हमें जीवन में कठिन श्रम करने का संदेश देती है। बिना श्रम के सफलता की आशा करना ईश्वर के प्रबंधन के विपरीत है। वैसे में ब्रह्म शक्ति का स्मरण कर मनुष्य जीवन के लक्ष्य को पा सकता है। योग शास्त्र में यह शक्ति स्वाधिष्ठान में स्थित है। अतः माता का ध्यान करने से मनुष्य सर्वार्थ सिद्धि व विजय प्राप्त करता है।




