

शामली/सहारनपुर। | जलालाबाद भूमि विवाद से गरमाई शामली की सियासत – सपा विधायक उमर अली खान पर दलित किसान ने लगाए गंभीर आरोप, जान से मारने व आत्मदाह की चेतावनी
शामली/सहारनपुर।
दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे किनारे स्थित शामली के जलालाबाद गांव की क़ीमती ज़मीन को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज विवाद सामने आया है, जिसमें सपा विधायक उमर अली खान और उनके भाई पर फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए दलित किसान की भूमि हड़पने का आरोप लगा है। यह विवाद अब केवल एक ज़मीन की लड़ाई नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और जातीय हलकों में हलचल पैदा कर चुका है।
पीड़ित किसान रूप सिंह, जो शामली के खानपुर गांव के निवासी हैं, का आरोप है कि 2014 में उनकी पौने तीन बीघा कृषि भूमि को धोखे से रजिस्ट्री करवा कर उमर अली खान और उनके भाई के नाम कर दिया गया। पीड़ित के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब हाल ही में भूमि पर निर्माण सामग्री डाली गई और खुदाई शुरू होने लगी। इस पर उन्होंने दस्तावेज़ निकलवाए और पाया कि ज़मीन का बैनामा 10 साल पहले ही हो चुका है, जबकि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई थी।
रूप सिंह का कहना है कि वह दलित वर्ग से आते हैं, और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं, जिसकी वजह से वर्षों तक इस धोखाधड़ी को चुनौती नहीं दे पाए। लेकिन अब उन्होंने हिम्मत जुटाकर शामली कोर्ट में मामला दायर किया है, जिसकी अगली सुनवाई 7 जुलाई 2025 को होनी है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिलाधिकारी शामली, जनसुनवाई पोर्टल और मानवाधिकार आयोग तक भी शिकायतें भेज दी हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित किसान ने आत्मदाह की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि “अगर मुझे न्याय नहीं मिला और मेरी ज़मीन नहीं लौटाई गई, तो मैं डीएम दफ्तर के सामने आत्मदाह करने को मजबूर हो जाऊंगा।” रूप सिंह की इस चेतावनी के बाद प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।
दूसरी ओर, विधायक उमर अली खान ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि “यह बैनामा पूरी तरह वैध है और इसकी कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी की गई थी। यह पूरा विवाद कुछ लोगों की साजिश है जो राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं या मुझे ब्लैकमेल कर रहे हैं। मैं अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखूंगा।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि “दलित होने की आड़ में भावनात्मक ब्लैकमेल की कोशिश हो रही है।”
इस मामले ने स्थानीय राजनीति को भी गर्मा दिया है। विपक्षी दल इसे दलित उत्पीड़न और भूमाफिया गठजोड़ का मामला बता रहे हैं, वहीं सत्ताधारी पक्ष अभी सावधानीपूर्वक दूरी बनाते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और किसान संगठनों ने इस मामले को जनहित में उठाने का एलान किया है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे धरना-प्रदर्शन की राह पर उतरेंगे।
अब नजरें 7 जुलाई की अदालती सुनवाई और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। क्या यह मामला एक सामान्य ज़मीन विवाद है या फिर किसी बड़े राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़ का हिस्सा? यह आने वाले हफ्तों में सामने आ सकता है।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
उत्तर प्रदेश महामंत्री – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
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