
वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़ डिस्ट्रिक्ट हेड चित्रसेन घृतलहरे(पेंड्रावन)सरसींवा (सारंगढ़-बिलाईगढ़)26 जुलाई 2025//तहसील के ग्राम गगोरी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक निंदनीय और चिंता जनक घटना सामने आई है। गांव के सरपंच गजपति जांगड़े (जाति: सतनामी, अनुसूचित जाति) को सार्वजनिक रूप से जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। यह घटना गुरुवार दोपहर लगभग 1:30 बजे उस समय हुई जब राजस्व विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में लगी हुई थी।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर मौजूद छत्रपाल पटेल और शत्रुधन पटेल ने सरपंच को गाली देते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और अपमानित करते हुए कहा – “साले चमार मादर**, तुम मेरा शिकायत किया है”*, जैसे घृणित शब्दों से मानसिक प्रताड़ना दी गई। यह घटना उस समय हुई जब तहसीलदार सरसींवा, पहवारी, उपसरपंच जीवनलाल यादव, पंच ईश्वर साहू, पतिराम साहू, विजय कुमार समेत कई ग्रामीण मौके पर मौजूद थे।
शिकायत दी गई, फिर भी नहीं मिली पावती
इस मामले को लेकर सरपंच गजपति जांगड़े व ग्रामीणों ने थाना सरसींवा में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध पंजीबद्ध करने की मांग करते हुए लिखित शिकायत दी है। लेकिन पुलिस द्वारा शिकायत की पावती तक नहीं दी गई, जिससे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश है।
आरोपी पर पहले से हैं गंभीर आरोप
जानकारी के अनुसार, आरोपी छत्रपाल पटेल पहले से ही विवादों में रहा है। उस पर 3 से 5 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा करने, छावड़र, नीम, कौहा, बम्बरी जैसे पेड़ काटने, और अन्य लोगों की निजी जमीन पर जबरन कब्जा करने के आरोप भी लगे हैं। इन मामलों को लेकर पूर्व में भी स्थानीय समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुई हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सरपंच के अपमान को लेकर गांव में रोष
सरपंच, जो कि पूरे ग्राम पंचायत का निर्वाचित जनप्रतिनिधि होता है, उसके साथ इस प्रकार का जातिगत व्यवहार न केवल सामाजिक रूप से घृणित है बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी अपमान है। वह भी तब, जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद हों और इसके बावजूद इस तरह की घटना हो जाए।
ग्रामीणों की मांग: हो सख्त कार्यवाही
गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में SC/ST एक्ट के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए, और आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कठोर दंड दिया जाए। साथ ही, पुलिस द्वारा शिकायत की पावती न देना भी पुलिस की निष्क्रियता को दर्शाता है, जिस पर जांच आवश्यक है।यह मामला केवल एक व्यक्ति के अपमान का नहीं, बल्कि एक प्रतिनिधि और एक समूचे समुदाय की गरिमा पर आघात का है। यदि ऐसे मामलों पर समय पर और सख्त कार्रवाई न हो, तो यह सामाजिक सौहार्द और संविधान में दिए गए समानता के अधिकारों पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।







