
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में चोरी की घटनाएं :: अगस्त–सितंबर और दिसंबर–जनवरी में क्यों बढ़ जाती हैं..?
बस्ती, 07 सितम्बर 2025।। विशेष रिपोर्ट
जिले में पिछले कुछ वर्षों से अपराध के पैटर्न का अध्ययन करने पर यह साफ होता है कि अगस्त–सितंबर और दिसंबर–जनवरी महीनों में चोरी की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की जाती हैं। स्थानीय पुलिस और विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और मौसमी कारण जिम्मेदार हैं। अधिकतर घटनाओं में देखा गया है कि चोरी की घटना को अंजाम देने वाले अक्सर 15- 16 से लेकर 30 साल की उम्र के होते हैं । यह अक्सर वह है जो नशे के आदी होते हैं और पैसे ना मिलने के कारण पहले छोटी-मोटी चोरी उसके बाद बड़ी चोरी की घटना को अंजाम देते हैं ।
⭐अगस्त–सितंबर: मानसून और आर्थिक दबाव ::
मानसून के महीनों में खेती-किसानी पर निर्भर लोगों की आय अनिश्चित हो जाती है। बारिश कम या ज्यादा होने पर फसलों पर असर पड़ता है और आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ लोग तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अवैध रास्ते अपनाते हैं।
कई अपराधी ऐसे होते हैं जो नशे आदि के आदी होते हैं | और वह अपनी जरूरत पूरा करने के लिए चोरी की घटना को अंजाम देते हैं । बारिश की वजह से अक्सर गांव के आसपास झाड़ियां हो जाती है जो उनके छिपने के काम आती है |
इसके अलावा इस समय गांवों से शहर की ओर अस्थायी पलायन बढ़ जाता है। मजदूरी और काम की तलाश में आए लोगों में से कुछ अपराध की राह पकड़ लेते हैं। बाजारों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जेबकतरी और छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं भी इसी दौरान ज्यादा देखने को मिलती हैं।
⭐दिसंबर–जनवरी: त्योहार और खाली घर ::
सर्दियों के महीनों में क्रिसमस, नववर्ष और मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है। लोग बड़ी मात्रा में खरीदारी करते हैं, घरों में नकद और कीमती सामान रखते हैं।
इसी समय छुट्टियों और यात्राओं के कारण कई घर खाली रह जाते हैं। अंधेरी लंबी रातें चोरों को वारदात के लिए अवसर देती हैं। ठंडक की वजह से लोग कंबल या रजाई के अंदर मुंह ढक कर सोते हैं और उन्हें बाहर तथा अन्य कमरों में होने वाली किसी हलचल का पता नहीं चलता | भीड़भाड़ वाले बाजारों और बस-रेलवे स्टेशनों पर पर्स-छीनने और मोबाइल चोरी जैसे मामले आम हो जाते हैं।
⭐पुलिस की तैयारी ::
बस्ती पुलिस ने इस मौसमी प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए अगस्त–सितंबर और दिसंबर–जनवरी में विशेष सतर्कता बरतने की रणनीति बनाई है। संवेदनशील बाजारों में अतिरिक्त गश्त, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और रात्रिकालीन चेकिंग को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से अपील की गई है कि नागरिक भी जागरूक रहें—खरीदारी के समय नकदी कम रखें, मोबाइल और कीमती सामान पर नजर रखें और लंबी यात्रा पर निकलते समय घर की सुरक्षा पुख्ता करें।
⭐निष्कर्ष ::
विशेषज्ञ मानते हैं कि चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं है, बल्कि यह सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से भी जुड़ी हुई है। इसलिए पुलिस सतर्कता के साथ-साथ रोजगार के अवसर और सामुदायिक जागरूकता भी अपराध पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वही अपने घरों को सूना ना छोड़ें, खिड़की दरवाजे मजबूत लगवायें तथा हो सके तो सीसी कैमरा लगवाएं । कीमती सामान सुरक्षित कमरे में सुरक्षित जगह पर रखें।
👉केवल पुलिस पर ना छोड़े क्योंकि पुलिस हर घर के आगे पीछे रखवाली नहीं कर सकती।
👉 परिवार सहित कहीं जाए तो उसे सोशल मीडिया पर ना डालें क्योंकि उसे पता चल जाता है कि आपका घर खाली है।
👉 किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को देखने पर तत्काल इसकी सूचना डायरेक्टर 112 या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन पर दें ।















