उत्तर प्रदेशसमाज और राजनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद अहम होगा

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद अहम होगा।।

चुनाव समीक्षा -2027 उत्तर प्रदेश

एक तरफ अखिलेश यादव हैं, जो लगातार “जनता के बीच का नेता” बनने की कोशिश में हैं। दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ हैं, जिनकी छवि “सख्त प्रशासक और कठोर फैसले लेने वाले नेता” की है।

अखिलेश यादव की टीम यह समझ चुकी है कि सिर्फ भाषणों से जनता नहीं जीती जाती। इसलिए वे लगातार छोटे-छोटे प्रतीकात्मक काम कर रहे हैं।  कभी ठेले से सब्ज़ी खरीदते हुए दिखाई देते हैं, कभी सड़क किनारे चाट खाते हुए, कभी पीड़ित परिवारों के घर जाकर सहारा बनते हैं, और कभी अपने काम की तारीफ करने वाले आम लोगों को सम्मानित कर देते हैं। इसके अलावा उनका PDA फार्मूला भी लोक सभा चुनावों में असरदार रहा हैं । छोटी छोटी इन घटनाओं का असर गहरा है । जनता उन्हें “हमारे बीच का इंसान” मानने लगी है। एक ऐसी छवि बन रही है जिसमें अखिलेश “पहुंच में आसान, मिलनसार और आम आदमी जैसा” लगते हैं। यानी वे धीरे-धीरे सीएम योगी की सख्त और दूर के नेता वाली इमेज को काटने की तैयारी कर रहे हैं। योगी जी की पहचान भी साफ़ है। सख्त प्रशासक, अपराधियों और माफिया पर कड़ा एक्शन और बिना समझौते के कड़े फैसले लेने वाले नेता हैं सीएम योगी।

पर इस छवि ने उन्हें जनता में भरोसा तो दिलाया है, लेकिन साथ ही एक दूरी भी पैदा कर दी है। लोग मानते हैं कि योगी जी कठोर फैसले लेते हैं, पर वे यह भी महसूस करते हैं कि उनसे मिलना या जुड़ना चाँद पर जाने जैसा मुश्किल है। चारों तरफ सुरक्षा और अफसरों का ऐसा घेरा है कि साधारण इंसान की सीएम तक सीधी पहुँच नहीं हो पाती। वहीं आज के डेट में अगर अखिलेश यादव से मिलना या जुड़ना बेहद आसान हैं , हर किसी से वो बड़ी ही गर्म जोशी से मिलते हैं और अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं। पर अगर यही अंतर 2027 तक बना रहा तो: जनता अखिलेश को “अपने बीच का” समझेगी, और योगी जी को “दूर के शासक” की तरह देखेगी। ऐसे में काम और विकास के बावजूद अखिलेश यादव जनता के दिल में जगह बनाने में सफल हो सकते हैं। उनकी नरमदिल और अपनापन भरी इमेज सीएम योगी की सख्त और दूर की इमेज पर भारी पड़ सकती है। इसलिए सिर्फ सख्त प्रशासक होना काफी नहीं है।

     अब ज़रूरत है कि योगी जी की छवि में यह पहलू भी जुड़े कि वे जनता के लिए “आसान और अपनापन वाले नेता” हैं। इसके लिये अब उनकी टीम को भी अहंकार के रथ से नीचे उतरकर कुछ इस दिशा में सोचने और करने का प्रयास करना चाहिये.. जिससे की उसका फायदा 2027 के विधानसभा चुनाव में मिल सके… इसके लिये एक विस्तृत योजना बनानी चाहिये.. सिर्फ बच्चों को चॉकलेट दिलवाने और स्कूल में दाखिला दिलवाने वाली खबरों को प्रचारित करने के अलावा कुछ और भी सोचना चाहिये.. वरना अपना क्या हैं ? हम तो प्रधान रहेंगे ही।

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