स्टांप पेपर पर शादी – कानूनी धोखा या सामाजिक खतरा?
भोपाल में स्टांप पेपर पर शादी करने का ट्रेंड खतरनाक रूप से बढ़ रहा है, जो युवतियों के लिए गंभीर परिणाम लेकर आ रहा है। हर महीने लगभग 45-50 लड़कियां इस तरह की कागजी शादी का शिकार हो रही हैं, जिसमें उनकी कानूनी सुरक्षा नहीं होती।
मीनाक्षी विजय कुमार भारद्वाज/मुंबई स्टांप पेपर पर शादी – कानूनी धोखा या सामाजिक खतरा?
महाराष्ट्र/मुंबई: भोपाल में स्टांप पेपर पर शादी करने का ट्रेंड खतरनाक रूप से बढ़ रहा है, जो युवतियों के लिए गंभीर परिणाम लेकर आ रहा है। हर महीने लगभग 45-50 लड़कियां इस तरह की कागजी शादी का शिकार हो रही हैं, जिसमें उनकी कानूनी सुरक्षा नहीं होती।
क्या है स्टांप पेपर मैरिज?
स्टांप पेपर मैरिज दरअसल एक झूठा कागजी समझौता है, जिसे शादी का रूप देने की कोशिश की जाती है। इसमें 500 रुपये के स्टांप पेपर पर दोनों पक्ष साइन करते हैं।
हालांकि, भारतीय कानून में इस तरह के स्टांप पेपर पर की गई शादी को मान्यता नहीं है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय:
1. स्टांप पेपर पर शादी का कोई कानूनी आधार नहीं है।
2. यह महज एक साथ रहने का शपथ-पत्र होता है, जिसे शादी नहीं माना जा सकता।
3. इस प्रकार के मामलों में महिलाएं कानूनी सुरक्षा के अधिकार खो देती हैं।
4. इस तरह की शादी करने वाले युवक अक्सर महिलाओं को धोखा देने के इरादे से ऐसा करते हैं।
कैसे होता है स्टांप मैरिज का धंधा?
कोर्ट के दलाल और नोटरी वकील मिलकर युवाओं को कानूनी झंझट से बचाने के नाम पर स्टांप पेपर मैरिज करवाते हैं।
ज्यादातर केस में पीड़ित महिलाएं कम पढ़ी-लिखी होती हैं, लेकिन शहरी व जॉब करने वाली महिलाएं भी इसका शिकार बन रही हैं।
वकीलों और दलालों को पता होता है कि यह शादी अवैध है, फिर भी वे पैसे के लालच में यह काम करते हैं।
प्रमुख मामले जो सच उजागर करते हैं:
1. सुहानी और दिव्यांश का मामला:
दिव्यांश ने खुद को अफसर का बेटा बताकर सुहानी से स्टांप पेपर पर शादी की।
दो बार अबॉर्शन कराने के बाद तीसरी बार सुहानी ने मना किया तो दिव्यांश ने रिश्ता तोड़ दिया।
जब सुहानी ने पुलिस में शिकायत की तो पता चला कि स्टांप पेपर मैरिज की कोई कानूनी मान्यता नहीं है।
2. रेशमा और राशिद का मामला:
राशिद ने शादी का झांसा देकर रेशमा से संबंध बनाए और कोर्ट मैरिज के नाम पर स्टांप पेपर पर साइन करवाए।
बाद में राशिद ने रेशमा का गर्भपात करवा दिया और फिर फरार हो गया।
थाने में शिकायत करने पर पुलिस ने बताया कि स्टांप मैरिज का कोई कानूनी आधार नहीं है।
पीड़ित महिलाओं को कैसे मिले न्याय?
धोखाधड़ी के केस: पीड़ित महिलाएं वकील और दलालों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत कर सकती हैं।
ज्यादती का मामला: महिलाओं के साथ यदि संबंध बनाए गए हैं, तो वे ज्यादती का केस दर्ज करवा सकती हैं।
काउंसलिंग और सहायता: जिला विधिक प्राधिकरण के माध्यम से पीड़ित महिलाएं काउंसलिंग प्राप्त कर सकती हैं।
कानूनी जानकारी जरूरी:
स्टांप पेपर मैरिज से जुड़े ज्यादातर केसों में जानकारी की कमी के कारण महिलाएं शोषण का शिकार हो रही हैं।
कोर्ट मैरिज: सिर्फ स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत रजिस्टर्ड शादी ही कानूनी रूप से वैध मानी जाती है।
शपथ-पत्र या एग्रीमेंट: किसी भी शपथ-पत्र या स्टांप पेपर पर शादी करने का कोई कानूनी महत्व नहीं है।
सरकार और प्रशासन को क्या कदम उठाने चाहिए?
1. नोटरी और दलालों पर सख्त कार्रवाई।
2. कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता अभियान।
3. महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए हेल्पलाइन।
4. शादी से जुड़े कानूनी अधिकारों के प्रति युवाओं को शिक्षित करना।
निष्कर्ष:
स्टांप पेपर पर शादी एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। युवाओं को इसकी वैधता और इसके खतरों के बारे में जागरूक करना जरूरी है ताकि महिलाएं किसी भी प्रकार के शोषण से बच सकें।