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मैहर

जिले का झुकेही क्षेत्र आज विकास और विनाश के बीच फंसा हुआ है। यहाँ की धरती से निकल रही छूही और चुना पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हो सकते थे, लेकिन हकीकत इसके उलट है।

यहाँ उत्पादन मैहर में, प्रदूषण मैहर में, बीमारी मैहर में, और जब बात मुनाफ़े व पहचान की आती है तो नाम लिया जाता है—कटनी का।

 

Screenshot 2026 01 25 05 44 05 96 6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7 1झुकेही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चल रहे छूही एवं चुना भट्ठों से निकलने वाला धूल और धुआँ स्थानीय लोगों के लिए अभिशाप बन चुका है। दिन के समय कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि सड़क तक दिखाई नहीं देती। सांस लेना दूभर हो जाता है, लेकिन इस धुएँ को नापने, रोकने या नियंत्रित करने वाला कोई नजर नहीं आता।

बीमार होती आबादी, बेपरवाह सिस्टम

स्थानीय नागरिकों के अनुसार क्षेत्र में सांस, आंखों और त्वचा से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसके बावजूद न तो कभी स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं, न कोई नियमित चिकित्सकीय जांच कराई जाती है।

भट्ठों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति और भी चिंताजनक है। बिना मास्क, बिना सेफ्टी किट, बिना किसी सुरक्षा मानक के वे दिन-रात धूल और धुएँ में काम करने को मजबूर हैं। पेट की मजबूरी उन्हें सवाल पूछने नहीं देती, और सिस्टम की चुप्पी उनकी जिंदगी को और असुरक्षित बना देती है।

 

Screenshot 2026 01 25 06 19 44 93 6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7नियम कागज़ों में, ज़मीनी हकीकत अलग

प्रदूषण नियंत्रण, खनन विभाग और श्रम विभाग जैसे जिम्मेदार तंत्रों की भूमिका इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। न खदानों की गंभीर जांच दिखाई देती है, न भट्ठों के प्रदूषण स्तर की निगरानी। नियम और कानून मानो सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गए हैं।

क्षेत्रवासियों के बीच यह चर्चा आम है कि रुपयों के दम पर सब कुछ “मैनेज” कर लिया गया है। यही कारण है कि नियमों पर कार्रवाई की जगह खामोशी देखने को मिलती है।

सबसे बड़ा सवाल : मैहर का माल, कटनी के नाम से क्यों?

जब चुना और छूही का उत्पादन झुकेही क्षेत्र में हो रहा है, तो बाजार में इसकी पहचान कटनी के नाम से क्यों कराई जा रही है?

यह केवल व्यापार का सवाल नहीं, बल्कि मैहर की पहचान और अधिकार का मुद्दा है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

इस पूरे विषय पर सबसे अधिक निराशाजनक है मैहर के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी। जिन पर जनता की आवाज़ बनने की जिम्मेदारी है, वे इस गंभीर समस्या पर मौन साधे हुए हैं। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

अब इंतज़ार नहीं, कार्रवाई चाहिए

झुकेही क्षेत्र के लोग आज प्रशासन की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। सवाल साफ है—

क्या इन बेलगाम चुना-छूही भट्ठों पर नियंत्रण लगेगा?

क्या मजदूरों को सुरक्षा और क्षेत्रवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा?

यह मुद्दा सिर्फ झुकेही का नहीं, पूरे मैहर जिले के भविष्य से जुड़ा है।

अब वक्त है कि धूल और धुएँ के इस सच पर पर्दा नहीं, कार्रवाई की रोशनी डाली जाए।

मैहर ब्यूरो चीफ

सुरेन्द्र कुमार शर्मा

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