अजीत मिश्रा (खोजी)
।। सिस्टम की ‘एक्सपायरी’: बस्ती में कूड़े के ढेर में मिलीं 2027 तक की सरकारी दवाइयां।।
बुधवार 28 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। प्रदेश की योगी सरकार एक ओर गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने के लिए बजट का पिटारा खोले बैठी है, वहीं बस्ती जिले के गौर ब्लॉक से आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यशैली पर कालिख पोत दी है। गौर ब्लॉक में समाज कल्याण कार्यालय के समीप भारी मात्रा में सरकारी दवाइयां लावारिस हालत में फेंकी हुई मिली हैं। विडंबना देखिए, जिन दवाओं को मरीजों के घाव भरने थे, वे आज सिस्टम की संवेदनहीनता के कारण कूड़े के ढेर में सड़ रही हैं।
🔥2027 तक थी मियाद, फिर क्यों बनीं ‘कबाड़’?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। मौके पर मिली दवाओं में कई ऐसी कीमती और जीवन रक्षक दवाइयां शामिल हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट (Expiring Date) साल 2027 तक है। सवाल यह उठता है कि जब दवाइयां खराब नहीं हुई थीं, तो उन्हें स्टोर से निकालकर कूड़ेदान में क्यों फेंका गया? क्या गौर ब्लॉक के मरीजों को इन दवाओं की जरूरत नहीं थी, या फिर यह किसी बड़े भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है?
🔥कमीशन का ‘खेल’ और गरीब की ‘जेब’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में तैनात कुछ चिकित्सकों और स्टाफ की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि:
चिकित्सक अस्पताल में मौजूद दवाइयां लिखने के बजाय बाहर की महंगी दवाइयां लिखते हैं।
सरकारी स्टॉक में रखी दवाइयां रखी-रखी पुरानी हो जाती हैं या रिकॉर्ड छिपाने के लिए उन्हें ठिकाने लगा दिया जाता है।
नतीजतन, गरीब मरीज अपनी गाढ़ी कमाई निजी मेडिकल स्टोरों पर लुटाने को मजबूर है।
🔥जिम्मेदारों की ‘उदासीनता’ पर उठते सवाल
समाज कल्याण कार्यालय जैसे सार्वजनिक स्थान के पास दवाओं का मिलना प्रशासन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन दवाओं का वितरण सुनिश्चित किया जाता, तो सैकड़ों जरूरतमंदों को राहत मिल सकती थी। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ‘अंधेरगर्दी’ ने सरकारी धन को मिट्टी में मिला दिया।
“यह सिर्फ दवाओं की बर्बादी नहीं, बल्कि गरीब जनता के हक पर डकैती है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए।” — स्थानीय निवासी
🔥 जवाबदेही तय होना जरूरी
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद बस्ती में इस तरह की लापरवाही प्रशासन की साख पर बट्टा लगा रही है। क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस मामले में केवल ‘जांच का आश्वासन’ देकर पल्ला झाड़ लेंगे, या फिर उन दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी जिन्होंने इन जीवन रक्षक दवाओं को कूड़ा बना दिया? यदि आज कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर किसी ब्लॉक में जनता का टैक्स इसी तरह नालियों और कूड़ेदानों में बहता नजर आएगा।
















