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शिव भक्तजनों के लिए महाशिवरात्रि किसी पर्व से कम नहीं होता है

वंदेभारतलाइवटीव न्युज, शनिवार 07 फरवरी 2026


====>; महाशिवरात्रि भगवान आशुतोष भोलेनाथ को समर्पित है। शिव के भक्तजनों के लिए महाशिवरात्रि का यह अवसर किसी बड़े पर्व से कम नहीं होता है। महाशिवरात्रि का यह पर्व प्रतिवर्ष फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाई जाती है। महाशिवरात्रि पर रात की पूजा का विशेष महत्व रहता है। महाशिवरात्रि पर भक्तजन निशीथ काल में भगवान आशुतोष भोलेनाथ बाबा शिव की पूजा अर्चना वंदना करते हैं। महाशिवरात्रि को लेकर इस बार भी थोड़ा असमंजस की स्थिति है। महाशिवरात्रि का यह पर्व 15 फरवरी को या 16 फरवरी 2026 को मनाई जायेगी? पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि पर मनाई जाती है। इस बार फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 15 फरवरी 2026 शाम को शुरू होकर इसके अगले दिन 16 फरवरी 2026 तक रहेगी। महाशिवरात्रि पर रात्रिकालीन पूजा और जागरण का विशेष महत्व होता है, महशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जायेगी। महशिवरात्रि का व्रत रखने और रात्रिकालीन पूजा करने के लिए सही तारीख भी 15 फरवरी है। महाशिवरात्रि पर आशुतोष भगवान भोलेनाथ शिव की पूजा का अपना विशेष महत्व होता है, इस समय पर भक्तजन निशीथ काल मे भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना करते हैं। पंचांग भेद के हिसाब से अलग अलग पचांगों में इसके समय में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है, किन्तु महाशिवरात्रि की पूजा का सर्वोत्तम समय मध्य रात्रि के आसपास ही माना जाता है। पूजा के दौरान शिवलिंग पर शुद्ध दूध, गंगाजल, जल, बेलपत्र, धतूरा, फूल अर्पित करते हुए आशुतोष भगवान भोलेनाथ शिव जी का पंचाक्षरी मंत्र- ॐ नम: शिवाय” का जाप करना उत्तम होता है। महाशिवरात्रि त्रयोदशी तिथि के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इस तिथि पर दिनभर व्रत उपवास करना चाहिए, व्रत उपवास में फलाहार किया जा सकता है। महाशिवरात्रि पर शाम के समय शिव मंदिर या फिर अपने घर मे स्थित मंदिर मे ही शिवलिंग का शुद्ध जल , दूध, गंगाजल धतूरा, फूल, बेलपत्र आदि से अभिषेक करना चाहिए। महाशिवरात्रि, रात में चार प्रहर की पूजा का विधान भी माना जाता है। पूजा पूर्ण होने पर अंत में भगवान गणेश शिव पार्वती की आरती करनी चाहिए, और रात्रिकाल में जागरण करते हुए श्रद्धा भक्ति पूर्वक भजन कीर्तन मंत्रों का जाप करना उत्तम होता है। महाशिवरात्रि के अगले दिन व्रत उपवास का पारण करना चाहिए। वैसे तो शिवरात्रि प्रतिमाह पड़ती है और एक वर्ष मे बारह शिवरात्रि आती हैं। परंतु फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि को आने वाली महाशिवरात्रि को भगवान आशुतोष भोलेनाथ शिवजी की पूजा आराधना वंदना का सबसे अधिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यतानुसार इसी दिन महाशिवरात्रि को भगवान भोलेनाथ शिव और देवी पार्वती जी विवाह संपन्न हुआ था। प्रचलित कथा है कि समुद्र मंथन के समय पर निकले विष को भगवान भोलेनाथ शिव जी ने अपने कंठ में ग्रहण कर संसार की रक्षा की थी, इसलिए भी भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से भी पुकारा जाता है। महाशिवरात्रि का यह पवित्र अवसर पूजा-आराधना साधना संयम और आत्मचिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि तिथि के दिन सच्ची श्रद्धा भक्तिभाव से भगवान आशुतोष भोलेनाथ शिव जी की पूजा आराधना से मानव जीवन की परेशानियां दूर होकर मन को शांति, आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर में पूजा की परंपरा भी रही है। पहला प्रहर-संध्याकाल मे -06:39बजे रात मे 09:45 बजे तक इस दौरान शाम होते ही पूजा शुरू करनी चाहिए। पूजा से पहले घर को साफ स्वच्छ करके साफ जगह पर शिवलिंग पर गंगाजल दूध बेलपत्र सफेद पुष्प आदि अर्पित करें और इस दौरान ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। दूसरा प्रहर- रात में – 09:45 बजे से रात्रि मे 12:52 तक’ -इस दौरान दीप धूप से भगवान भोलेनाथ शिवजी का पूजा वंदना करनी चाहिए। चंदन तिलक लगाकर शिवलिंग के की परिक्रमा करनी चाहिए। शिवजी जो को पूजा में फल मिठाई मोदक आदि भोग अर्पित करना चाहिए। तीसरा प्रहर- मध्य रात्रि मे 12:52 बजे से सुबह के 03:59 बजे तक- इस दौरान शिवजी का ध्यान करते हुए मन को शांत रखें और अपनी मनोकामना को ध्यान मे रखते हुए ध्यान लगाकर शिवजी की भक्ति करें। चतुर्थ प्रहर- प्रातःकाल में 03:59 बजे से ,सुबह 07:06 बजे तक- इस दौरान महाशिवरात्रि अंतिम चरण में शिवजी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर आरती करनी चाहिए और ब्रह्ममुहूर्त के समय पर अपने प्रिय परिजनों के साथ मिलकर पूजा का समापन करना चाहिए, सुबह के ताजे स्वच्छ वातावरण में भगवान भोलेनाथ शिवजी को प्रसाद और शुद्ध जल अर्पित करना चाहिए। निशीथ काल का समय – मध्य रात्रि में 12:28 बजे से 01:17 बजे तक- यह समय सबसे अधिक शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान का भजन कीर्तन शिवजी की स्तुति और शिव पंचाक्षरी मंत्र ॐ नम: शिवाय” का जाप करना उत्तम रहता है। यही रात्रि का मुख्य पूजा का समय भी रहता है। ।
( यहां पर दी गई जानकारी में कुछ त्रुटियां हो सकती है, अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के विद्वान योग्य ब्राह्मण पंडितों से सलाह अवश्य लिजिए)। आप सभी शिव भक्तों को महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं। आशुतोष भोलेनाथ भगवान शिवजी सबको सुख शांति, सौभाग्य, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करे।

अनंतपद्मनाभ

D Anant Padamnabh, village- kanhari, Bpo-Gorakhpur, Teh-Pendra Road,Gaurella, Distt- gpm , Chhattisgarh, 495117,
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