
कथा श्रवण करने नेताप्रतिपक्ष डा चरणदास महंत, मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद ज्योत्स्ना महंत पूर्व विधायक गुलाब कमरो एवं विनय जायसवाल भी पहुचे।
सोनहत | महाशिवरात्रि के महापर्व पर सोनहत की पावन धरा भक्ति और आस्था के अभूतपूर्व संगम की साक्षी बनी। पिछले कई दिनों से चल रही शिवमहापुराण कथा का भव्य समापन ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग’ वर्णन, पार्थिव शिवलिंग पूजन और ‘देवी चरित्र’ के मार्मिक प्रसंगों के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने भगवान भोलेनाथ के जयकारों से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।
*द्वादश ज्योतिर्लिंग: साक्षात शिव का दर्शन*
कथावाचक ने अंतिम दिन की शुरुआत करते हुए भारत के विभिन्न कोनों में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति और उनके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक, महादेव ने भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लिए। श्रद्धालुओं को बताया गया कि इन ज्योतिर्लिंगों के नाम स्मरण मात्र से ही व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
*पार्थिव शिवलिंग पूजन का महत्व*
विशेष रूप से पार्थिव शिवलिंग (मिट्टी के शिवलिंग) के निर्माण और पूजन की महिमा बताई गई। कथा में कहा गया कि कलयुग में पार्थिव पूजन शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल और उत्तम मार्ग है। महाशिवरात्रि के दिन भक्तों ने सामूहिक रूप से मिट्टी के शिवलिंगों का निर्माण कर उनका अभिषेक किया, जो दृश्य अत्यंत मनमोहक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर था।
*देवी चरित्र: शक्ति और भक्ति का संगम*
कथा के दौरान देवी चरित्र का वर्णन करते हुए बताया गया कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। माता सती और माता पार्वती के चरित्र के माध्यम से नारी शक्ति, तप और समर्पण की महत्ता को रेखांकित किया गया। देवी सती के त्याग और पार्वती जी की कठोर तपस्या के प्रसंगों को सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे।
*कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का आगमन: ‘अतिथि देवो भव’ की सनातनी परंपरा*
आयोजन की भव्यता तब और बढ़ गई जब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल इस भक्ति के महाकुंभ में शामिल होने पहुंचे। उन्होंने न केवल शिव महापुराण कथा की महिमा का बखान किया, बल्कि आयोजन की व्यवस्था और जन-जुड़ाव की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
मंच पर एक और मर्यादापूर्ण दृश्य तब उभरा जब मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के समीप पहुँचकर बड़ी ही विनम्रता से हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। सत्ता और विपक्ष के बीच इस शिष्टाचार ने यह सिद्ध कर दिया कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन वरिष्ठता और पद की गरिमा का सम्मान छत्तीसगढ़ की रग-रग में है। मंत्री जी ने कहा— “महादेव की कथा जहाँ हो, वहाँ केवल भक्त होते हैं। इस पावन धरा पर सभी का एक साथ जुड़ना सुखद संकेत है।”
शिव महापुराण के भक्तिमय माहौल में एक क्षण ऐसा आया जिसने पंडाल में बैठे हजारों श्रद्धालुओं के दिल को छू लिया। मर्यादा और सादगी का यह दृश्य तब घटित हुआ जब कथा वाचक ने सम्मानस्वरूप नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को व्यासपीठ से उद्बोधन (भाषण) देने का आग्रह किया।
आमतौर पर राजनीतिक मंचों पर अपनी वाकपटुता के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. महंत ने बड़ी ही विनम्रता से माइक थामने के बजाय हाथ जोड़कर कहा— “महाराज जी, मैं यहाँ बोलने नहीं, बल्कि महादेव की पावन कथा सुनने आया हूँ। आज मुझे केवल एक भक्त के रूप में शिव रसपान करने दें।” डॉ. महंत के इस जवाब से अभिभूत होकर कथा वाचक ने उनके इस ‘त्याग’ और ‘सरलता’ की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि— “सार्वजनिक जीवन के शिखर पर बैठकर भी ऐसी सहजता और भक्ति के प्रति ऐसा समर्पण विरले ही देखने को मिलता है। यही डॉ. महंत के विराट व्यक्तित्व की असली पहचान है, जहाँ पद से बड़ा महादेव का दरबार है।”
*इनकी रही उपस्थिति*
कथा में नेताप्रतिपक्ष डा चरणदास महंत, मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद ज्योत्स्ना महंत पूर्व विधायक गुलाब कमरो एवं विनय जायसवाल भी प्रभा पटेल राजकुमार केशरवानी, योगेश शुक्ला अशोक जायसवाल वेदांती तिवारी, सहित कॉंग्रेस और भाजपा के कई दिग्गज नेता शामिल रहे।














