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पूर्वांचल में ‘कागजी जहर’ का कहर: खाकी की नाक के नीचे फल-फूल रहा जाली नोटों का सिंडिकेट!

अर्थव्यवस्था पर सर्जिकल स्ट्राइक: सीमा पार से आई नकली करेंसी ने पूर्वांचल के बाजारों को घेरा।

अजीत मिश्रा (खोजी)

🔥पूर्वांचल में ‘कागजी जहर’ का जाल: खाकी की चौकस निगाहों के नीचे फल-फूल रहा जाली नोटों का साम्राज्य🔥

ब्यूरो रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश

  • सफेदपोशों की शह या पुलिस की सुस्ती? गाँवों तक पहुँचा जाली नोटों का काला साम्राज्य।
  • नकली नोटों की मंडी बनता पूर्वांचल: आखिर क्यों इस ‘आर्थिक आतंकवाद’ पर नहीं लग पा रही लगाम?
  • सिर्फ ‘कैरियर’ पुलिस की गिरफ्त में, असली आका अब भी कानून की पहुँच से कोसों दूर!
  • डिजिटल इंडिया के दौर में भी ‘कैश’ का खेल: जाली नोटों के जाल में फंसा आम आदमी।

पूर्वांचल। उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल क्षेत्र इन दिनों एक ऐसे ‘साइलेंट किलर’ की गिरफ्त में है, जो गोलियों से नहीं बल्कि जाली करेंसी से देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहा है। सीमावर्ती जिलों से शुरू हुआ जाली नोटों का यह काला खेल अब गाँवों की पगडंडियों से लेकर शहरों के शोरूम तक पहुँच चुका है। ताज्जुब की बात यह है कि पुलिस की तमाम ‘घेराबंदी’ के बावजूद, इस संगठित अपराध का सिंडिकेट न सिर्फ सलामत है, बल्कि और अधिक हाई-टेक हो चुका है।

भीड़ का फायदा और ‘सॉफ्ट टारगेट’ पर वार

जाली नोटों के सौदागरों का नेटवर्क किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम कर रहा है। सूत्रों की मानें तो इनका मुख्य निशाना साप्ताहिक बाजार, ग्रामीण मेले और छोटे दुकानदार हैं। यहाँ लेन-देन की रफ़्तार तेज होती है और नोट की परख करने वाली मशीनें नदारद। गिरोह के गुर्गे बड़ी चालाकी से असली नोटों की गड्डी के बीच ‘कागजी जहर’ को खपा रहे हैं।

समीक्षात्मक पहलू: आखिर क्या वजह है कि बड़ी मछलियों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुँच पा रहे? अब तक की ज्यादातर गिरफ्तारियां महज ‘कैरियर्स’ (नोट पहुँचाने वाले मजदूर) तक सीमित रही हैं, जबकि इस पूरे नेक्सस के असली आका अभी भी सुरक्षित पनाहगाहों में बैठकर करोड़ों का वारा-न्यारा कर रहे हैं।

सीमा पार से सप्लाई और स्थानीय साठगांठ

खुफिया रिपोर्टों के संकेत डराने वाले हैं। सीमावर्ती इलाकों से सटे होने के कारण पूर्वांचल जाली नोटों की डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है।

  • सुनियोजित नेटवर्क: नोटों की छपाई कहीं और, खेप की सप्लाई कहीं और और वितरण कहीं और।
  • तकनीकी चुनौती: नकली नोटों की गुणवत्ता इतनी सटीक है कि आम आदमी के लिए असली और नकली का फर्क करना लगभग नामुमकिन हो गया है।

प्रशासनिक सतर्कता: केवल कागजों पर या धरातल पर?

प्रशासन बार-बार अपील करता है कि “सावधान रहें”, लेकिन क्या केवल सावधानी ही काफी है? जब तक इंटेलिजेंस विंग इस नेटवर्क की जड़ यानी ‘सप्लाई चेन’ को ध्वस्त नहीं करती, तब तक छुटपुट गिरफ्तारियां केवल एक दिखावा ही साबित होंगी। अर्थव्यवस्था के इस कैंसर को काटने के लिए केवल मरहम लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की जरूरत है।

सावधानी ही एकमात्र बचाव

फिलहाल, जनता के पास सतर्क रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। पुलिस ने बड़े लेन-देन में बैंकों और डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। यदि आपके पास कोई संदिग्ध नोट आता है, तो उसे दबाने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचित करें, क्योंकि आपकी एक छोटी सी लापरवाही देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रहार हो सकती है।

✍️ जाली नोटों का यह कारोबार केवल एक अपराध नहीं, बल्कि आर्थिक आतंकवाद है। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस इस ‘कागजी मकड़जाल’ को कब तक पूरी तरह छिन्न-भिन्न कर पाती है।

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