
*धनबाद :* देश में प्लास्टिक कचरे की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. शहरों, गांवों, नदियों और नालों में फैला यह कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है. वहीं, वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है, खासकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसी चीजों पर असर पड़ने की आशंका है.
इन दोनों चुनौतियों का समाधान अब धनबाद के IIT (ISM) के वैज्ञानिकों ने विकसित की गई एक नई तकनीक से निकलता दिख रहा है. इस तकनीक से प्लास्टिक कचरे को सीधे क्लीन फ्यूल हाइड्रोजन में बदला जा सकता है.
*प्लाज्मा रिएक्टर तकनीक, क्या है खासियत?*
IIT (ISM) के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने प्लाज्मा रिएक्टर आधारित तकनीक तैयार की है. इसकी अगुवाई विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. एजाज अहमद ने की है. टीम में डॉ. इंद्रमोहन और डॉ. शिव शंकर प्रसाद प्रमुख रूप से शामिल हैं. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्लास्टिक कचरे को न सिर्फ नष्ट करती है, बल्कि उससे दो मूल्यवान उत्पाद भी तैयार करती है, पहला हाइड्रोजन गैस (क्लीन फ्यूल) और दूसरा कार्बन नैनोट्यूब्स (उच्च मूल्य वाला सामग्री). डॉ. इंद्रमोहन ने बताया कि यह तकनीक प्लास्टिक के साथ-साथ बायोमास (जैसे पराली) पर भी काम करती है, जिससे पर्यावरण को दोहरा लाभ मिलेगा.
*क्या है इस तकनीक की प्रक्रिया*
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक को विकसित करने में करीब एक साल का समय लगा. लैब ट्रायल में नतीजे बेहद सफल रहे हैं. अब पेटेंट कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.
*ईंधन संकट में मजबूत विकल्प*
डॉ. शिव शंकर प्रसाद ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात घरेलू ईंधन (एलपीजी) और वाहन ईंधन (पेट्रोल-डीजल) दोनों पर असर डाल सकते हैं. ऐसे में यह तकनीक भविष्य के ईंधन संकट का मजबूत विकल्प साबित हो सकती है.
*हाइड्रोजन का कैसे होगा इस्तेमाल,आर्थिक फायदा भी बड़ा*
इस प्रक्रिया से बनने वाले कार्बन नैनोट्यूब्स का बाजार मूल्य एक लाख रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा है. इनका इस्तेमाल बुलेटप्रूफ जैकेट, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कंपोजिट मटेरियल आदि में होता है.
*क्या होगा इस तकनीक का फायदा*
अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर लागू की गई, तो भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकता है. प्लास्टिक कचरे को “वेस्ट टू वेल्थ” में बदलने का यह मॉडल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का अनोखा उदाहरण बन सकता है. IIT (ISM) धनबाद के इस शोध से उम्मीद जगी है कि जल्द ही प्लास्टिक कचरा न सिर्फ समस्या बनेगा, बल्कि समाधान का हिस्सा बनेगा.







