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बस्ती: आंगनबाड़ी भर्ती में ‘महाघोटाला’, निरस्त प्रमाण पत्र पर अधिकारी मेहरबान; आखिर कितना चला ‘विटामिन M’?

गौर ब्लॉक में अंधेरगर्दी: कागजों में जो 'अपात्र' है, साहब की फाइलों में वही 'प्रथम' है!

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी गौर की आंगनबाड़ी भर्ती: निरस्त आय प्रमाण पत्र पर ‘मेहरबान’ अधिकारी, आखिर क्या है इस ‘अंधेरगर्दी’ का राज?

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • भ्रष्टाचार की ‘आंगन’ बाड़ी: रोजगार सेवक की पत्नी को जिताने के लिए अधिकारियों ने बेची शुचिता?
  • जब पोर्टल पर ‘निरस्त’ है आय प्रमाण पत्र, तो DPO और CDPO को क्यों दिख रहा है सही?
  • गौर ब्लॉक की भर्ती में बड़ा खेल: तहसीलदार ने काटा पत्ता, तो अधिकारियों ने साठ-गांठ कर थमा दी नियुक्ति!
  • CDO की जांच में खुलेगा भ्रष्टाचार का पिटारा? ऐनपुर ग्राम पंचायत की भर्ती पर उठे गंभीर सवाल।
  • 8 हजार पाने वाले रोजगार सेवक की पत्नी का 46 हजार का आय प्रमाण पत्र! राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट पर उठे सवाल।
  • साहब! ये कैसी नियुक्ति? ई-डिस्ट्रिक्ट पर जो ‘फर्जी’ है, विभाग के लिए वो ‘पात्र’ कैसे?
  • कमिश्नर की चौखट पर न्याय की गुहार: क्या गौर के भ्रष्ट अधिकारियों पर गिरेगी ‘बाबा’ की गाज?

बस्ती। जनपद के गौर ब्लॉक में आंगनबाड़ी सहायिका नियुक्ति प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में है। सरकारी सिस्टम की शुचिता का दम भरने वाले अधिकारियों की नाक के नीचे ‘पात्र को अपात्र’ और ‘फर्जी को खास’ बनाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। मामला ऐनपुर ग्राम पंचायत का है, जहाँ एक रोजगार सेवक की पत्नी को लाभ पहुँचाने के लिए नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा दी गईं। सवाल उठ रहा है कि आखिर जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) और सीडीपीओ (CDPO) गौर को एक निरस्त प्रमाण पत्र में इतनी दिलचस्पी क्यों है? क्या यह महज लापरवाही है या फिर ‘विटामिन-M’ (धनबल) का बड़ा खेल?

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राजस्व कर्मियों की मिलीभगत और आय का ‘जादू’

भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ा झोल आय प्रमाण पत्र को लेकर है। एक रोजगार सेवक, जिसे शासन से लगभग 8000 रुपये मानदेय मिलता है, उसकी पत्नी का आय प्रमाण पत्र महज 46,000 रुपये का कैसे बन गया?

बड़ा सवाल: जब आवेदन के समय संबंधित हल्का लेखपाल अंगद यादव थे, तो आवेदन दूसरे लेखपाल अरविंद कुमार के पास कैसे पहुँचा?

खुलासा: शिकायतकर्ता अनिल कुमार की आपत्ति पर तहसीलदार ने जांच की और पाया कि राजस्व कर्मी की रिपोर्ट गलत थी। नतीजतन, 12 जनवरी को उक्त आय प्रमाण पत्र खारिज कर दिया गया।

ऑनलाइन वेरिफिकेशन के दावे हुए ‘हवा-हवाई’

हैरानी की बात यह है कि जब ई-डिस्ट्रिक्ट (E-District) पोर्टल पर प्रमाण पत्र ‘निरस्त’ बोल रहा था, तब विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय आँखें क्यों मूंद लीं?

“पीड़ित का आरोप है कि CDPO और DPO ने निरस्त प्रमाण पत्र को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे वरीयता देकर रोजगार सेवक की पत्नी को मेरिट में प्रथम स्थान पर ला खड़ा किया। क्या विभाग में ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गया है?”

शिकायतों पर मौन रहे जिम्मेदार, अब ‘साहब’ करेंगे इंसाफ?

पीड़ित अनिल कुमार ने आय प्रमाण पत्र निरस्त होने की सूचना साक्ष्यों समेत DM, CDO, DPO और CDPO को डाक द्वारा भेजी थी। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज को तवज्जो देना विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब यह मामला मंडलायुक्त (Commissioner) के दरबार में पहुँचा है। कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को जांच सौंपी है। जनपद के लोग अब टकटकी लगाए देख रहे हैं कि क्या जिले के ‘तेजतर्रार’ सीडीओ साहब इस भ्रष्टाचार की फाइल को दफन करेंगे या पीड़ित को न्याय दिलाएंगे?

मुख्यमंत्री की चौखट पर दस्तक की तैयारी

पीड़ित का कहना है कि यदि जिले के उच्च अधिकारियों ने संलिप्त कर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो वह सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस सिंडिकेट का पर्दाफाश करेगा।

देखना यह है कि योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों को गौर ब्लॉक के ये अधिकारी कितनी चुनौती दे पाते हैं!

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