

बलौदाबाजार। समय की पाबंदी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करने वाले शहर के वरिष्ठ समाचार पत्र वितरक डिकेश्वर वर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके आकस्मिक निधन की खबर से न केवल पत्रकारिता जगत, बल्कि पूरे बलौदाबाजार शहर में शोक की लहर दौड़ गई है।
40 वर्षों का अटूट सफर: मौसम बदला, पर नहीं बदली दिनचर्या
डिकेश्वर वर्मा जी ने अपने जीवन के लगभग 40 साल अखबार वितरण के सेवा कार्य में समर्पित कर दिए। कड़कड़ाती ठंड हो, मूसलाधार बारिश या झुलसा देने वाली गर्मी—शहर की गलियों में उनकी साइकिल की घंटी और अखबार पहुँचने की आहट कभी नहीं रुकी। वे एक ऐसे सेतु थे, जो हर सुबह दुनिया भर की खबरों को पाठकों के ड्राइंग रूम तक पहुँचाते थे।
प्रेस क्लब में उमड़ा शोक: ‘सच्चे कर्मवीर’ को दी गई विदाई
उनके सम्मान में बलौदाबाजार प्रेस क्लब द्वारा एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
”डिकेश्वर वर्मा महज एक हॉकर नहीं थे, बल्कि वे सूचना तंत्र की उस मजबूत कड़ी का हिस्सा थे जिनके बिना पत्रकारिता अधूरी है। उनकी कर्तव्यनिष्ठा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा रहेगी।”
— प्रेस क्लब पदाधिकारी
उपस्थित गणमान्य जन
शोक सभा में प्रेस क्लब के प्रमुख सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की:
अध्यक्ष: नरेश गनशानी
उपाध्यक्ष: दिलीप महेश्वरी
सचिव: दलजीत सिंह चावला
सहसचिव: विजय तिवारी
कोषाध्यक्ष: राजेश्वर गिरी
अन्य सदस्य: राघवेंद्र सिंह, गोविन्द रात्रे, राजकुमार वलेचा, श्रवण ध्रुव, प्रीतलाल कुर्रे, पुष्पकांत मेजर, मोहित मरकाम, तुलसी साहू, राजू पाल, किशोर बंजारे
डिकेश्वर वर्मा का जाना एक युग का अंत है। बलौदाबाजार की सुबह अब उनके बिना अधूरी महसूस होगी, लेकिन उनकी ‘कर्मवीर’ वाली छवि हमेशा शहरवासियों के मानस पटल पर अंकित रहेगी।





