

“दारुल उलूम देवबंद के नीचे शिव मंदिर होने का दावा: सहारनपुर में नई बहस, हिंदू रक्षा दल ने खुदाई की उठाई मांग”
सहारनपुर जनपद के देवबंद स्थित विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार मामला किसी धार्मिक कार्यक्रम या शिक्षा व्यवस्था को लेकर नहीं, बल्कि एक बड़े और संवेदनशील दावे को लेकर चर्चा में है। हिंदू संगठन हिंदू रक्षा दल ने दावा किया है कि दारुल उलूम परिसर के लगभग 14 फीट नीचे भगवान शिव का प्राचीन मंदिर दबा हुआ है। संगठन ने इस संबंध में सहारनपुर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वैज्ञानिक तरीके से खुदाई कराने की मांग की है।
यह मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है। हिंदू रक्षा दल के पदाधिकारियों का कहना है कि उनके पास ऐसे “ऐतिहासिक संकेत” और स्थानीय स्तर पर प्राप्त कुछ जानकारियां हैं, जिनसे यह संभावना जताई जा रही है कि वर्तमान परिसर के नीचे प्राचीन हिंदू मंदिर मौजूद हो सकता है। संगठन का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच और पुरातत्व विभाग की निगरानी में खुदाई कराए तो वास्तविकता सामने आ सकती है।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे संगठन के एक पदाधिकारी ने बेहद आक्रामक बयान देते हुए कहा कि यदि उनका दावा गलत साबित हो जाए तो उन पर भ्रामक जानकारी फैलाने का मुकदमा दर्ज किया जाए, यहां तक कि उन्हें फांसी तक दे दी जाए। इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है।
हालांकि अभी तक प्रशासन या किसी सरकारी एजेंसी की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है। जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की समीक्षा करने की बात कही है, लेकिन किसी भी प्रकार की खुदाई या जांच को लेकर अभी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और बिना प्रमाण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि दारुल उलूम देवबंद केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में इस्लामिक शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। यहां देश-विदेश से हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। ऐसे में इस प्रकार के दावों ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
पिछले कुछ वर्षों में देश के कई धार्मिक स्थलों को लेकर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दावे सामने आते रहे हैं। कई मामलों में अदालतों ने सर्वे और जांच के आदेश दिए, जबकि कई मामलों में प्रशासन ने शांति व्यवस्था को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया। देवबंद का यह मामला भी अब उसी दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों के बीच इस विषय को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे इतिहास की जांच का विषय बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश मान रहे हैं। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित जांच को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
यदि भविष्य में इस मामले में किसी प्रकार की जांच, सर्वे या पुरातत्व विभाग की कार्रवाई होती है, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल प्रशासन बेहद सावधानी के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
सहारनपुर
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