सिद्धार्थनगर में ‘मौत का रेस्टोरेंट’: अवैध सिलेंडर के जखीरे के साथ पकड़ा गया होटल मालिक, दर्ज हुई FIR
मुनाफे के लिए रची जा रही थी 'तबाही': स्टार यूपी 55 होटल पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 12 सिलेंडर जब्त
अजीत मिश्रा (खोजी)
सिद्धार्थनगर में ‘काले’ कारनामों का पर्दाफाश: रसोइया और ग्राहक की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले होटल मालिक पर FIR
- गैस की कालाबाजारी पर वार: सिद्धार्थनगर के टिकुइया चौराहे पर होटल मालिक पर मुकदमा, मचा हड़कंप
- रसोई में ‘गैस बम’: अवैध सिलेंडरों से खिलवाड़ कर रहा था होटल मालिक, पूर्ति विभाग ने दिखाया ठेंगा
- बस्ती मंडल में गैस माफियाओं के खिलाफ प्रशासन सख्त: होटल संचालक के खिलाफ FIR से हड़कंप
बस्ती/सिद्धार्थनगर: क्या आप अपने परिवार के साथ बाहर भोजन करते समय सुरक्षित हैं? सिद्धार्थनगर जिले के एक होटल की करतूत ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है। जिले में गैस की कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पूर्ति विभाग ने ‘स्टार यूपी 55 होटल/रेस्टोरेंट’ पर जो छापा मारा, उसने रोंगटे खड़े कर दिए हैं।

सुरक्षा को ताक पर रखकर, मौज-मस्ती की कमाई!
टिकुइया चौराहे पर स्थित इस ‘स्टार यूपी 55’ रेस्टोरेंट में प्रशासन की टीम ने जब दस्तक दी, तो अंदर का नजारा किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। रसोई में 02 घरेलू गैस सिलेंडर धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे थे। जब टीम ने स्टोर रूम खंगाला, तो वहां 07 और घरेलू सिलेंडर और 03 व्यावसायिक सिलेंडर मिले। यानी कुल 12 सिलेंडरों का जखीरा, जो एक मामूली चिंगारी से पूरे इलाके को श्मशान में बदलने के लिए काफी था।
प्रशासन की सख्ती, माफियाओं की अक्ल ठिकाने
रेस्टोरेंट के मालिक मोहम्मद सलीम के पास इन सिलेंडरों का कोई वैध दस्तावेज नहीं था। अपनी जेब भरने के चक्कर में इन लोगों ने सरकारी नियमों—’द्रवित पेट्रोलियम गैस (प्रदाय एवं वितरण का विनियमन) आदेश 2000’—की धज्जियां उड़ा दीं। जिला पूर्ति अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बिना किसी नरमी के, जिलाधिकारी के आदेशानुसार गोलहौरा थाने में FIR दर्ज कराई है।
बस्ती मंडल के लिए एक चेतावनी
यह घटना केवल सिद्धार्थनगर तक सीमित नहीं है। बस्ती मंडल के तमाम इलाकों में ऐसे कई ‘मौत के सौदागर’ रेस्टोरेंट मालिकों के रूप में पनप रहे हैं, जो मुनाफा कमाने के लिए आम जनता की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल एक कार्रवाई तक सीमित न रहे। क्या इन अवैध सिलेंडरों के पीछे किसी बड़े गैस माफिया का हाथ है? क्या स्थानीय स्तर पर गैस एजेंसियां इन अवैध संचालकों की मिलीभगत से आपूर्ति कर रही हैं? जनता को जवाब चाहिए। जब तक ऐसे माफियाओं को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा और उनके लाइसेंस रद्द नहीं किए जाएंगे, तब तक ये अवैध ‘गैस बम’ आपके और हमारे बीच यूं ही धधकते रहेंगे।
प्रशासन जागे, जनता सचेत हो!
यह मामला उन सभी रेस्टोरेंट संचालकों के लिए एक चेतावनी है जो नियमों को रद्दी की टोकरी में फेंक चुके हैं। गोलहौरा थाने में दर्ज हुआ यह मुकदमा केवल एक शुरुआत होनी चाहिए। अब बारी पूरे बस्ती मंडल में एक सघन अभियान चलाकर ऐसे ‘सुरक्षा से खिलवाड़’ करने वालों को सबक सिखाने की है।














