भ्रष्टाचार का नंगा नाच: ‘गबन’ साबित होने के बाद भी सरकारी खजाने पर जारी है डाका!
रूधौली ब्लॉक में खुली लूट: जांच में धांधली की पुष्टि के बाद भी बेखौफ जारी रहा भुगतान!
अजीत मिश्रा (खोजी)
रूधौली ब्लॉक में भ्रष्टाचार का खुला खेल: ‘गबन’ साबित होने के बावजूद जारी रहा सरकारी खजाने का बंदरबांट
- करमकला में सरकारी धन का बंदरबांट: शिकायतों के बाद भी अधिकारियों की मिलीभगत से जारी है भ्रष्टाचार!
- ‘गबन’ साबित, फिर भी खजाना सुरक्षित: रधौली के भ्रष्ट तंत्र के सामने बेबस है प्रशासन!
- बस्ती का रधौली ब्लॉक बना भ्रष्टाचार का अड्डा: मानकों को ताक पर रख निकाली जा रही है लाखों की धनराशि
बस्ती: रूधौली ब्लॉक का ग्राम पंचायत करमकला इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। मामला विकास कार्यों में अनियमितता और सरकारी धन की लूट का है, जहाँ जांच में धांधली साबित होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी बेखौफ होकर भुगतान करते रहे।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम पंचायत करमकला में इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में भारी अनियमितता की शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने 26 सितंबर 2024 को ऑनलाइन पोर्टल (शिकायत संख्या 40018524026050) के माध्यम से आरोप लगाया कि कराए गए निर्माण कार्य मानकों के सर्वथा विपरीत हैं और सड़क कई स्थानों से उखड़ चुकी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, तत्कालीन खंड विकास अधिकारी (BDO) रूधौली द्वारा जांच कराई गई, जिसमें शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए।
जांच रिपोर्ट को ठेंगा और भुगतान का सिलसिला जारी
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जांच में शिकायत सही पाए जाने के बावजूद संबंधित परियोजनाओं के लिए सरकारी खजाने से भुगतान नहीं रोका गया। जांच के बाद उम्मीद थी कि काम रोका जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी, लेकिन परिणाम इसके विपरीत रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, अनियमितताओं की सूची इस प्रकार है:
- निर्माण में धांधली: खड़ंजा से दुर्गा के घर तक के मार्ग पर बेसिंग कराए बिना सीधे मिट्टी पर ईंटें बिछा दी गई थीं, जिससे सड़क उखड़ गई। खड़ंजा से परशुराम के घर तक बने मार्ग पर भी किनारों पर आवश्यक बेसिंग नहीं मिली और खुदाई में ईंटों के टुकड़े पाए गए। साथ ही, तीरथ के घर से राम बहादुर के घर तक बने मार्ग पर भी मानकों के विपरीत कार्य की पुष्टि हुई।
- धन की हेराफेरी: शिकायतकर्ता का आरोप है कि 14 सितंबर 2024 (शिकायत से पहले) को ही मनरेगा मद से तीन परियोजनाओं के लिए 4600, 4600 और 2760 रुपये का भुगतान बिना कार्य कराए ही कर दिया गया था।
- वर्ष 2026 में भी जारी रहा खेल: ताजा आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2026 में भी उन्हीं कार्य योजनाओं पर लाखों रुपये का भुगतान निकाला गया। इसमें 14वें वित्त आयोग से खड़ंजा से दुर्गा के घर तक के मार्ग के लिए 1,18,565 रुपये और अन्य मद में 3,107 रुपये निकाले गए। इसी प्रकार, तीरथ के घर से राम बहादुर के घर तक के मार्ग के लिए पंचम राज्य वित्त आयोग से 1,07,255 रुपये और 2,997 रुपये का भुगतान किया गया।
ग्रामीणों का आक्रोश और मांग
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का स्पष्ट आरोप है कि बिना जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लग सकी है।
अब ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो सके और निकाली गई सरकारी धनराशियाँ वापस ली जा सकें।








