

बलौदाबाजार: जिले में विभिन्न प्रकार के अवैध कारोबारों को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं। नागरिकों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन, नशीली दवाओं की बिक्री और शराब के अनधिकृत कारोबार जैसे विषयों पर प्रशासन को और अधिक कड़ाई करने की आवश्यकता है। हालांकि जिला प्रशासन, पुलिस, आबकारी और वन विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी नियंत्रण की मांग की जा रही है।
अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सक्रिय हुआ तंत्र
जिले में नए पुलिस कप्तान के आने के बाद से अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी देखी गई है। प्रशासन द्वारा अवैध कार्यों पर अंकुश लगाने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है। वहीं, वन विभाग भी अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले वनांचलों और नदी घाटों के आसपास अवैध रेत परिवहन एवं वन संपदा के नुकसान को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है। सरकार द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर के माध्यम से आम नागरिक अब अवैध गतिविधियों की सूचनाएं सीधे साझा कर पा रहे हैं।
जवाबदेही तय करने पर सरकार का रुख सख्त
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि अवैध कारोबार को रोकने में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे वह राजस्व विभाग हो, पुलिस हो या वन विभाग, यदि अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में चूक होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में यह विषय प्रमुखता से बना हुआ है कि जिले में प्रशासन की कार्यप्रणाली में और अधिक कसावट लाए जाने की आवश्यकता है।
सामाजिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था की प्राथमिकता
जिले को एक सुदृढ़ बनाने हेतु प्रशासनिक अमले का समन्वय आवश्यक है। विशेषकर रेत माफियाओं द्वारा पर्यावरणीय क्षति को रोकने के लिए वन और राजस्व विभाग का आपसी तालमेल और सख्त प्रवर्तन (Enforcement) समय की मांग है। आम जनता का मानना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर निगरानी को और अधिक मजबूत किया जाए, तो जिले में व्याप्त इन अवैध गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाया जा सकता है। पुलिस और प्रशासन के प्रति जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं कि वे निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।










