बस्ती: कुदरहा में PWD का ‘भ्रष्ट खेल’, बनते ही उखड़ी सड़क; सरकारी खजाने की खुली लूट!
तिघरा में सड़क निर्माण में 'महाघोटाला': गिट्टी-डामर गायब, कमीशनखोरी में डूबा PWD! सड़क या भ्रष्टाचार का दलदल? कुदरहा में ठेकेदार की गुंडागर्दी के आगे नतमस्तक प्रशासन।
अजीत मिश्रा (खोजी)
तिघरा में सड़क या ‘धोखा’? कुदरहा में PWD की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भारी पड़ा भ्रष्टाचार
- योगी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को ठेंगा! तिघरा में घटिया सड़क निर्माण से ग्रामीणों का फूटा गुस्सा।
- क्या रसूखदार ठेकेदारों को मिली है सरकारी धन लूटने की खुली छूट? तिघरा के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा।
बस्ती: उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को धरातल पर पलीता लगाने का काम बस्ती जिले के कुदरहा विकास खंड में हो रहा है। यहाँ के तिघरा गांव में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाई जा रही सड़क का हाल यह है कि निर्माण कार्य पूरा होते ही सड़क का अस्तित्व मिटने लगा है। घटिया सामग्री के इस्तेमाल और सरकारी धन की लूट से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
बनते ही उखड़ी सड़क, गिट्टी-डामर का अता-पता नहीं
तिघरा गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। सड़क पर गिट्टी और डामर की जगह केवल धूल और मिट्टी का नाममात्र लेप लगाया गया है। आलम यह है कि सड़क बनते ही हाथ से उखड़ने लगी है। घटिया निर्माण कार्य न केवल सरकार के खजाने को चूना लगा रहा है, बल्कि ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब भी बन गया है।
रसूखदार ठेकेदार और मौन अधिकारी
स्थानीय लोगों का कहना है कि काम करने वाला ठेकेदार रसूखदार है, जिसके आगे विभाग के अधिकारी पूरी तरह नतमस्तक हैं। कमीशनखोरी के इस खेल में PWD के भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत साफ नजर आ रही है। इस ‘भ्रष्ट जुगलबंदी’ के कारण ही ग्रामीणों को नरकीय सड़क नसीब हो रही है, जबकि सरकारी कागजों में यह सड़क चमचमाती दिखाई जा रही होगी।
ग्रामीणों में उबाल, DM से गुहार की तैयारी
सड़क की दुर्दशा देख ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। तिघरा वासियों का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते ठेकेदार की मनमानी पर लगाम नहीं लगाई, तो वे जिला अधिकारी (DM) से मिलकर इस पूरे खेल की उच्च स्तरीय जांच और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करेंगे।
बड़े सवाल
- क्या शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति केवल फाइलों तक सीमित है?
- आम जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है?
- अधिकारी किसके दबाव में इस खुली लूट को मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं?
तिघरा गांव के लोग अब न्याय की उम्मीद में बैठे हैं। देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई करता है या फिर रसूख के आगे एक बार फिर ‘न्याय’ की बलि चढ़ा दी जाएगी।








