बभनी चौराहे पर ‘जंगलराज’: दिनदहाड़े गला रेतकर हत्या, कानून व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कानून का खौफ खत्म! सरेआम गला रेतने वाले दरिंदों ने दहलाया संतकबीरनगर बख्शे नहीं जाएंगे कातिल: बभनी चौराहे पर हुई हत्या के बाद पुलिस की कार्रवाई, पर सुरक्षा पर बड़ा 'प्रश्नचिह्न'
अजीत मिश्रा (खोजी)
संतकबीरनगर: बभनी चौराहे पर ‘कानून के राज’ को चुनौती, सरेआम गला रेतने की घटना से दहला समाज
- चेहरा दिखा अपराधियों का, पर सिस्टम का चेहरा कब बदलेगा? संतकबीरनगर में सनसनीखेज हत्या
- खाकी की मुस्तैदी या अपराधियों का दुस्साहस? बभनी चौराहे पर हुई खूनी वारदात ने खोली सुरक्षा की पोल
संतकबीरनगर, 21 जून 2026।। उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के बखिरा क्षेत्र के बभनी चौराहे पर घटित हुई हत्या की वारदात ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। 30 वर्षीय युवक आनंद की धारदार हथियार से गला रेतकर की गई निर्मम हत्या महज एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के प्रति बढ़ते दुस्साहस का प्रतीक है। भरी दोपहरी या व्यस्त चौराहे पर इस तरह की दरिंदगी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या अपराधियों के मन में खाकी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है?
‘राम-राज’ में सरेआम हत्या का खूनी खेल
पुलिस ने भले ही 24 घंटे के भीतर तीन आरोपियों—नासिर, निरहू उर्फ साकिर और जैगम—को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाई हो, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये अपराधी इतने बेखौफ कैसे हो गए कि उन्होंने भरी बस्ती में एक युवक की जान लेने की हिम्मत कर डाली? मृतक के पिता का आरोप है कि आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। यदि यह आरोप सच है, तो यह घटना न केवल हत्या है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने वाली एक सोची-समझी साजिश है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई बनाम सुरक्षा का सवाल
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के नेतृत्व में बखिरा पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी सराहनीय है, लेकिन जनता की सुरक्षा केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कानून का असली इकबाल तब बुलंद होता है जब अपराधी वारदात करने से पहले सौ बार सोचे। बभनी चौराहे जैसे सार्वजनिक स्थान पर धारदार हथियार लेकर घूमना और हत्या कर देना, पुलिस गश्त और खुफिया तंत्र की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। क्या क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी केवल दिखावे की रह गई है?
क्या सजा का डर खत्म हो गया है?
बीएनएस (BNS) की धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने कड़ा रुख तो दिखाया है, लेकिन समाज को ‘त्वरित न्याय’ की दरकार है। अक्सर देखा गया है कि ऐसे गंभीर मामलों में पुलिस गिरफ्तारी तो कर लेती है, मगर कानूनी प्रक्रियाओं के जाल में फंसकर सजा मिलने में वर्षों लग जाते हैं। अपराधियों का मनोबल तभी टूटेगा जब उन्हें समयबद्ध तरीके से कड़ी से कड़ी सजा मिले।
प्रशासन के लिए चेतावनी
घटनास्थल पर एडीजी गोरखपुर और डीआईजी बस्ती का पहुंचना यह दर्शाता है कि शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। मगर, केवल निरीक्षण और दिशा-निर्देशों से अपराध नहीं रुकेंगे। जिले में बढ़ते आपराधिक घटनाओं के ग्राफ को थामने के लिए प्रशासन को कठोर और ठोस नीति अपनानी होगी।
बभनी चौराहे की यह वारदात प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि अपराधी चाहे किसी भी बिरादरी या रसूख का हो, कानून के हाथ उसकी गर्दन तक इतनी तेजी से पहुंचें कि दोबारा किसी को ऐसी दरिंदगी की हिम्मत न हो।
समाज अब कोरे आश्वासनों और गिरफ्तारियों के दिखावे से नहीं, बल्कि न्याय के ठोस नतीजों से संतुष्ट होगा।






