
ये मामला बीकापुर तहसील, अयोध्या का है जहाँ वरासत दर्ज कराने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
मुर्दे का बयान दर्ज रामखेलावन की मौत 21 जुलाई 2017 को हो चुकी थी, लेकिन तहसील रिकॉर्ड में 16 दिसंबर 2019 को उनका बयान दर्ज दिखाया गया
फर्जी वरासत आदेशलेखपाल भीम सिंह ने अपनी रिपोर्ट और वंशावली में मृतक को जीवित दिखाया। इसी आधार पर तत्कालीन तहसीलदार दिविजय सिंह ने 20 दिसंबर 2019 को वरासत आदेश पास कर दिया
आदेश निरस्त मामला SDM बीकापुर कोर्ट पहुंचा। जांच में गड़बड़ी मिली और 2 मई 2022 को वो फर्जी वरासत आदेश निरस्त कर दिया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने 8 लोगों को तलब किया है – अजय, मथाराम, खदेरू, लालता प्रसाद, मायाराम वर्मा, तत्कालीन लेखपाल भीम सिंह, तत्कालीन पेशकार और तत्कालीन तहसीलदार दिविजय सिंह
इन पर IPC की धाराओं में जालसाजी, कूटरचना, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का केस चलेगा। अगली सुनवाई 23 जुलाई को है।
इस केस से तहसील की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। वरासत जैसे मामलों में मृत व्यक्ति के नाम पर जमीन-जायदाद हड़पने का ये तरीका सामने आया है।
तुम्हें इस मामले की और कोई डिटेल चाहिए या किसी खास एंगल से समझना है?











