बस्ती: उच्च प्राथमिक विद्यालय जोगापुर में कलावा विवाद, शिक्षक ज्ञान दास पर बच्चों से धार्मिक धागे उतरवाने का गंभीर आरोप
विद्यालय में धार्मिक आस्था का अपमान: शिक्षक की हरकत से डरे छात्र, हिन्दू युवा वाहिनी ने की कड़ी कार्रवाई की मांग हरैया का जोगापुर विद्यालय सुर्खियों में: शिक्षक ज्ञान दास पर बच्चों को धमकी देने और कलावा कटवाने का आरोप
अजीत मिश्रा (खोजी)
शिक्षा के मंदिर में ‘अधर्म’ का पाठ: क्या शिक्षक का काम बच्चों की आस्था को कुचलना है?
- धार्मिक चिन्हों पर प्रतिबंध का आरोप: सहायक शिक्षा निदेशक तक पहुँचा मामला, शिक्षक के खिलाफ जांच शुरू
- “आस्था पर प्रहार बर्दाश्त नहीं”: विद्यालय में धार्मिक भेदभाव के खिलाफ मोर्चाबंदी, दोषी शिक्षक पर कार्रवाई की तैयारी
बस्ती: शिक्षा का मंदिर जिसे संस्कार और ज्ञान का केंद्र माना जाता है, आज वह बस्ती के हरैया में एक शर्मनाक घटना के कारण सुर्खियों में है। उच्च प्राथमिक विद्यालय जोगापुर से जो खबरें सामने आई हैं, वे न केवल विचलित करने वाली हैं, बल्कि एक शिक्षक की मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़ी करती हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय के सहायक अध्यापक ज्ञान दास पर आरोप है कि उन्होंने विद्यालय के बच्चों के हाथों से धार्मिक कलावा और गले से धागा जबरन उतरवाकर उन्हें फेंक दिया। यह केवल एक धागा उतरवाने की बात नहीं है, बल्कि बच्चों की धार्मिक स्वतंत्रता और उनकी आस्था पर सीधा प्रहार है।

आस्था पर प्रहार, विद्यालय में दहशत का माहौल
आरोप है कि शिक्षक ने बच्चों को धमकी दी कि यदि कोई भी छात्र भविष्य में धार्मिक चिह्न पहनकर स्कूल आया, तो उसका नाम विद्यालय से काट दिया जाएगा और उसे पीटा जाएगा। शिक्षा के मंदिर में शिक्षक की यह तालिबानी सोच बच्चों के मन में डर पैदा कर रही है। जिन बच्चों को शिक्षा के माध्यम से अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाना था, उन्हें आज अपनी धार्मिक पहचान के कारण विद्यालय में ही ‘अपमान’ का सामना करना पड़ रहा है।
हिन्दू युवा वाहिनी ने खोला मोर्चा
इस घटना के बाद हिन्दू युवा वाहिनी के जिला महामंत्री विनय सिंह ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “धार्मिक आस्था का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” विनय सिंह ने सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) को पत्र सौंपकर शिक्षक ज्ञान दास के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जांच और प्रशासन की जिम्मेदारी
इस पूरे प्रकरण पर सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। विभाग की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि किसी को भी किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करने का अधिकार नहीं है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी शिक्षक के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न यह है: क्या एक शिक्षक को यह अधिकार है कि वह अपने वैचारिक एजेंडे को मासूम बच्चों पर थोपे? विद्यालय में शिक्षा के बजाय धार्मिक असहिष्णुता का वातावरण बनाना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह एक शिक्षक के पेशे की गरिमा को भी तार-तार करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में शिक्षा के मंदिर में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








