मण्डी परिषद बस्ती में निविदा प्रक्रिया में बड़ी धांधली; ‘चहेतों’ को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी!
क्या मण्डी परिषद का टेंडर केवल 'अपनों' के लिए? करोड़ों के सरकारी धन की हानि का आरोप। निविदा में पारिवारिक मिलीभगत का खेल: मैसर्स शुक्ला कान्स्ट्रक्शन ने खोले परत-दर-परत भ्रष्टाचार के राज।
मण्डी परिषद बस्ती में निविदा प्रक्रिया में बड़ी धांधली का आरोप: क्या चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी खजाने को लगाया जा रहा चूना?
- सरकारी खजाने को लाखों का चूना: टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों और ठेकेदारों की ‘सांठ-गांठ’ का खुलासा!
- मण्डी परिषद बस्ती: नियम ताक पर, चहेते ठेकेदारों की चांदी; क्या अब प्रशासन जागेगा?
- टेंडर रेट खोलने में ‘जल्दबाजी’ और नियमों की अनदेखी; मण्डी परिषद में मची खलबली।
- नोडल अधिकारी एडीएम बस्ती प्रतिपाल सिंह चौहान की संदिग्ध भूमिका।
बस्ती। जनपद के मण्डी परिषद में निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को लेकर ‘मेसर्स शुक्ला कान्स्ट्रक्शन’ द्वारा गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। निविदा संख्या-141 (दिनांक 19.05.2026) के तहत सड़क निर्माण कार्यों में हुई कथित धांधली को लेकर स्थानीय प्रशासन और उच्च अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।मंडी परिषद बस्ती द्वारा डाली गई निविदा संख्या-141 दिनांक- 19.05.2026 में अनियमितता और धन बंटवारे का आरोप लगाते हुए एक फर्म ने जिलाधिकारी बस्ती से शिकायत की है।
मेसर्स शुक्ला कंस्ट्रक्शन, ग्राम-जगदीशपुर, पोस्ट-बाल्टरगंज के प्रबंधक द्वारा दिनांक 18.07.2026 को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि लाट संख्या-11 के अंतर्गत विशेषरगंज ककरहवा मझौवा रोड से चौरवा का भगवान कार्य के लिए उनकी फर्म द्वारा दिनांक 04.07.2026 को मंडी परिषद में निविदा डाली गई थी।
पत्र के अनुसार इस कार्य के लिए कुल तीन निविदादाताओं ने प्रतिभाग किया था- 1. सर्वश्री शुक्ला कंस्ट्रक्शन, 2. मेसर्स राजनीति यादव, 3. मेसर्स राजन कुमार यादव।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि एक निविदादाता द्वारा अन्य को टेंडर न डालने देने और 6-7 लाख रुपये में अधिकारियों से सांठगांठ कर अपने चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा कमेटी द्वारा नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। मेसर्स शुक्ला कंस्ट्रक्शन का कहना है कि उनका जमानतनामा निरस्त कर दिया गया है।
फर्म ने आरोप लगाया है कि यह पूरी तरह से सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी नीति के खिलाफ है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला फैसला है। इससे पूर्व भी उन्होंने जिलाधिकारी बस्ती और उपनिदेशक निर्माण मंडी परिषद से शिकायत कर आख्या मांगे जाने की बात कही है, लेकिन आरोप है कि कोई कार्रवाई न होते हुए टेंडर सेट खोल दिया गया और डीडीसी बस्ती द्वारा मनमाने तरीके से कार्य किया जा रहा है।
मेसर्स शुक्ला कंस्ट्रक्शन ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उक्त निविदा में पुनरीक्षण कर निविदा को निरस्त किया जाए और नई निविदा सूची जारी की जाए, अन्यथा की स्थिति में वह न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य होंगे।
शिकायतकर्ता फर्म ‘मेसर्स शुक्ला कान्स्ट्रक्शन’ द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप निम्नलिखित हैं:
- मिलीभगत (सांठ-गांठ) का खेल: आरोप है कि जिन फर्मों (मैसर्स रामजीत यादव और मैसर्स राजन कुमार यादव) को टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया, उनके बीच पारिवारिक संबंध (मामा-भांजे) हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि ये फर्में किसी भी अन्य ठेकेदार को निविदा में भाग नहीं लेने देतीं और अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर को अपने पक्ष में करवा लेती हैं।
- नियमों की अनदेखी और अपात्रता: फर्म ने आरोप लगाया है कि मण्डी परिषद की निविदा समिति ने नियमों को ताख पर रखते हुए ‘मेसर्स शुक्ला कान्स्ट्रक्शन’ को बिना किसी ठोस आधार के ‘अपात्र’ (disqualified) घोषित कर दिया, ताकि उनके चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा सके।
- सरकारी धन की भारी हानि: इस पूरी प्रक्रिया के कारण सरकारी खजाने को लगभग 6,69,902.00 रुपये का भारी नुकसान होने का अनुमान है। सरकार की पारदर्शिता की नीतियों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
- धरोहर राशि के समायोजन में भेदभाव: एक अन्य मामले में, फर्म का आरोप है कि उन्हें एक अन्य टेंडर में एल-1 से 10/06/26 को लाटरी से होने के बावजूद, धरोहर राशि (security deposit) को समायोजित करने में जानबूझकर देरी और बाधाएं उत्पन्न की गईं। इसके विपरीत, चहेते ठेकेदारों को नियमों में ढील दी जा रही है।
प्रशासनिक उदासीनता और टाल-मटोल
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस पूरे मामले की जानकारी पहले भी अपर जिलाधिकारी (एडीएम) बस्ती को दी गई थी, जिसके बाद उपनिदेशक, निर्माण मण्डी परिषद से विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की गई थी। आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक रिपोर्ट के ही अधिकारियों ने आनन-फानन में निविदा की दरें (टेंडर रेट) खोल दीं। यह प्रशासनिक स्तर पर घोर लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
आगे की कार्यवाही और मांग
’मेसर्स शुक्ला कान्स्ट्रक्शन’ ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- निष्पक्ष जांच: निविदा प्रक्रिया का उच्च स्तरीय और निष्पक्ष पुन: परीक्षण कराया जाए।
- पात्रता सूची: पुरानी सूची को रद्द कर नई और पारदर्शी पात्रता सूची जारी की जाए।
- कानूनी चेतावनी: यदि मामले में त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो शिकायतकर्ता ने न्यायपालिका (न्यायालय) की शरण लेने की स्पष्ट चेतावनी दी है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
क्या मण्डी परिषद बस्ती में ठेकेदारी प्रथा केवल ‘चहेतों के लिए’ सीमित हो गई है? आम ठेकेदार जो नियमों के साथ काम करना चाहते हैं, उन्हें सिस्टम में दरकिनार किया जा रहा है। इस मामले में अब शासन और उच्च अधिकारियों का क्या रुख रहता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। क्या इस बार दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों के ढेर में कहीं दब जाएगा?
यह जनपद में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के सही उपयोग पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। शिकायती पत्र में कहा गया है कि जिस फर्म को ज्वाइन्ट आधार पर काम दिया गया है उसकी आड़ में धन का बंदरबांट किया जा रहा है। जबकि पूरी तरह से मानकों को पूरा करने वाली फर्मों को दरकिनार किया जा रहा है। फर्म ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराकर निविदा को निरस्त करने और पुनः पारदर्शी तरीके से टेण्डर प्रक्रिया कराने की मांग की है।
शिकायत की प्रतिलिपि मण्डलायुक्त महोदय बस्ती, निविदा कमेटी और उप निदेशक निर्माण मण्डी परिषद बस्ती को भी भेजी गई है।
















