एम्बुलेंस बनी ‘सवारी गाड़ी’! मरीजों की जान से खिलवाड़ कर कौन चला रहा है यह मौत का खेल?
राजस्थान किशनगढ़ की सड़कों पर बेखौफ दौड़ रही 'आईसीयू ऑन व्हील्स' (RJ39PA0870), मूकदर्शक बना बैठा है प्रशासन!जहाँ एक ओर एम्बुलेंस का सायरन (Siren) सुनते ही हर आम इंसान का कलेजा कांप उठता है, लोग अपने वाहन किनारे कर देते हैं और भगवान से दुआ मांगते हैं कि "हे ईश्वर! अंदर बैठे मरीज की जान बच जाए"—वहीं राजस्थान के किशनगढ़ से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली और खौफनाक हकीकत सामने आई है, जिसने इंसानियत, कानून और प्रशासन के माथे पर कालिख पोत दी है।
एम्बुलेंस बनी ‘सवारी गाड़ी’! मरीजों की जान से खिलवाड़ कर कौन चला रहा है यह मौत का खेल?
राजस्थान/किशनगढ़ की सड़कों पर बेखौफ दौड़ रही ‘आईसीयू ऑन व्हील्स’ (RJ39PA0870), मूकदर्शक बना बैठा है प्रशासन!जहाँ एक ओर एम्बुलेंस का सायरन (Siren) सुनते ही हर आम इंसान का कलेजा कांप उठता है, लोग अपने वाहन किनारे कर देते हैं और भगवान से दुआ मांगते हैं कि “हे ईश्वर! अंदर बैठे मरीज की जान बच जाए”—वहीं राजस्थान के किशनगढ़ से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली और खौफनाक हकीकत सामने आई है, जिसने इंसानियत, कानून और प्रशासन के माथे पर कालिख पोत दी है।जिस वाहन पर ‘जीवनरक्षक’ और ‘ICU on Wheels’ का बोर्ड चमक रहा है, वह असल में मरीजों की जिंदगी बचाने के बजाय, सड़कों पर अवैध टैक्सियों की तरह धड़ल्ले से ‘सवारियां’ ढोने का धंधा कर रहा है! क्या है इस सनसनीखेज मामले की पूरी सच्चाई?सामने आई इस एक्सक्लूसिव और दस्तावेजी तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि जोधपुर की मेडिकल सर्विस ‘SK Health Care Jodhpur’ की जिस एम्बुलेंस (पंजीकरण संख्या: RJ 39 PA 0870) को किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुँचाने के लिए सड़क पर होना चाहिए था, उसका इस्तेमाल किस बेशर्मी के साथ यात्रियों को ढोने के लिए किया जा रहा है।गाड़ी के पिछले हिस्से पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है—”सबकी सेवा सबको प्यार”, लेकिन इस सुंदर स्लोगन की आड़ में जो खेल चल रहा है, वह जनता की जान के साथ क्रूर मजाक और पैसों की हवस का सबसे बड़ा सबूत है।वे 5 तीखे और चुभने वाले सवाल – जिनका जवाब प्रशासन को देना ही होगा!क्या एम्बुलेंस अब कमर्शियल पैसेंजर टैक्सियां बन चुकी हैं?जिस गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर, जीवनरक्षक दवाइयां और वेंटिलेटर होना चाहिए था, उसमें आम यात्रियों को भरकर घुमाने का परमिट किसने दिया?आरटीओ (RTO) और पुलिस की आंखें क्यों बंद हैं?किशनगढ़ और आसपास के टोल नाकों से गुजरने वाली इस फर्जी एम्बुलेंस पर क्या किसी भी ट्रैफिक या परिवहन अधिकारी की नजर नहीं पड़ी? या फिर यह सब किसी गहरी मिलीभगत (भ्रष्टाचार) का नतीजा है?क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?अगर किसी दिन कोई गंभीर मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हो और उसे एम्बुलेंस की जगह यह ‘सवारी गाड़ी’ मिल जाए, तो उसकी मौत का जिम्मेदार कौन होगा?कागजों में एम्बुलेंस और धंधा सवारी ढोने का?क्या इस वाहन के कागजात (Fitness & Permit) सिर्फ टैक्स बचाने और मेडिकल रियायत पाने के लिए एम्बुलेंस के नाम पर रजिस्टर्ड हैं, जबकि अंदर से इसका पूरा खेल कमर्शियल सवारी वाहन जैसा है?आखिर कब टूटेगी कुंभकर्णी नींद?क्या राजस्थान के जिम्मेदार महकमे तब जागेंगे जब कोई बड़ा कांड सामने आ जाएगा?जनता का फूटा भयंकर गुस्सा और सीधी चेतावनी!किशनगढ़ के प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं और आम जनता में इस घटना को लेकर खदबदाता हुआ आक्रोश है। लोगों का साफ कहना है कि इस तरह के लोग उस पवित्र सेवा को कलंकित कर रहे हैं जिस पर देश का हर नागरिक अपनी आँख बंद करके भरोसा करता है। जनता ने जिला प्रशासन, परिवहन मंत्री और स्वास्थ्य विभाग को खुली चेतावनी देते हुए हुंकार भरी है कि:तुरंत हो गिरफ्तारी: वाहन संख्या RJ39PA0870 को तत्काल प्रभाव से सीज किया जाए और इसके मालिक तथा ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।बड़ी धाराओं में मुकदमे: इस वाहन द्वारा अब तक किए गए अवैध परिवहन, टैक्स चोरी और धोखाधड़ी की हाई-लेवल जुडिशल जांच बैठाकर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।पूरे राजस्थान में महा-अभियान: सिर्फ किशनगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में चल रही ऐसी फर्जी और ढोंगी एम्बुलेंसों की एक-एक कर कुंडली खंगाली जाए ताकि भविष्य में कोई भी इंसानियत की इस पवित्र एम्बुलेंस सेवा का सौदा करने की हिम्मत न कर सके!”एम्बुलेंस कोई सवारी ढोने वाली बस या टैक्सी नहीं, बल्कि मौत के मुंह से खींचकर लाने वाली आखिरी उम्मीद होती है! इस पवित्र सेवा को कमाई का अड्डा बनाने वाले दरिंदों के खिलाफ ऐसी खौफनाक और मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए, जिसे देखकर अपराधियों की रूह कांप जाए!”