बस्ती: विकास खंड बनकटी की ग्राम पंचायतों में मनरेगा (जी राम जी योजना) के तहत बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी का खुलासा; कागजों पर दौड़ रहा विकास, धरातल पर कार्य शून्य।
ग्रामीणों का कहना है कि कागजों और ऑनलाइन रिकॉर्ड में तो बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दिखाकर बजट का आहरण किया जा रहा है, लेकिन मौके पर धरातल पर कोई काम संचालित नहीं हो रहा है। बिना मजदूर लगाए फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन को सीधे तौर पर लूटा जा रहा है।
बस्ती: विकास खंड बनकटी की ग्राम पंचायतों में मनरेगा (जी राम जी योजना) के तहत बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी का खुलासा
- फर्जीवाड़े का खेल: बनकटी ब्लॉक के अहिरौली, खोरिया, कडसरी और खैराटी समेत दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में बिना मजदूरों की उपस्थिति के ऑनलाइन मास्टर रोल में दर्ज हो रही है हाजिरी।
- सरकारी धन की खुली लूट: ग्रामीणों का आरोप—ग्राम प्रधानों और रोजगार सेवकों की मिलीभगत से बिना धरातल पर काम कराए निकाला जा रहा है मनरेगा का लाखों रुपये का बजट।
- प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल: जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस बड़े खेल और रसूखदारों के आगे नतमस्तक तंत्र को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी।
- जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा: उत्तर प्रदेश सरकार के दावों के विपरीत धरातल पर नगण्य कार्य होने के बावजूद रोजाना भेजी जा रही फर्जी उपस्थिति रिपोर्ट; निष्पक्ष जांच और भौतिक सत्यापन की मांग तेज।
बस्ती: जनपद के विकास खंड बनकटी के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों में ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मीडिया टीम द्वारा की गई धरातलीय पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि कागजों पर मजदूरों की भारी-भरकम फौज खड़ी कर सरकारी धन का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि मैदानी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।
विभिन्न ग्राम पंचायतों में दर्ज फर्जी हाजिरी का विवरण
पड़ताल के दौरान विकास खंड बनकटी की कई ग्राम पंचायतों में बिना मौके पर काम हुए ऑनलाइन फर्जी हाजिरी दर्ज किए जाने के आंकड़े सामने आए हैं:
- अहिरौली: 110 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- बेलसुई: 153 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- देवमी: 78 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- डढवा लगुनी: 55 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- घुघसा: 32 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- कडसरी: 182 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- गुलरिहा सिरमा: 53 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- खामोखर: 65 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- खैराटी: 136 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- खडौहा: 100 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- खोरिया: 245 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- कुरियार: 47 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- महथा: 60 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- मकदुमपुर: 80 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- पडरी: 96 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- पिकौरा शुक्ल: 97 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- रौतापार: 49 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- संडा: 55 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- सिकरा बरगाह: 101 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
- सिरौता: 115 मजदूरों की फर्जी हाजिरी
ग्रामीणों के गंभीर आरोप: कागजों पर दौड़ रहा विकास, धरातल पर शून्य
स्थानीय ग्रामीणों ने मीडिया टीम को अपनी पीड़ा बताते हुए आरोप लगाया कि संबंधित ग्राम प्रधानों और रोजगार सेवकों की मिलीभगत से बिना किसी वास्तविक कार्य के ऑनलाइन फर्जी हाजिरी दर्ज की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कागजों और ऑनलाइन रिकॉर्ड में तो बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दिखाकर बजट का आहरण किया जा रहा है, लेकिन मौके पर धरातल पर कोई काम संचालित नहीं हो रहा है। बिना मजदूर लगाए फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन को सीधे तौर पर लूटा जा रहा है।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सिस्टम पर उठ रहे सवाल
- रसूखदारों के आगे नतमस्तक तंत्र: ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर रसूखदार और भ्रष्ट नुमाइंदों के आगे जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रहा है।
- जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा: इस तरह के मामलों से उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- जिम्मेदारों की चुप्पी: धरातल पर कार्य नगण्य होने के बावजूद मास्टर रोल में लगातार हाजिरी दर्ज होने और इसके बावजूद अधिकारियों की तरफ से कोई कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- निष्पक्ष एवं भौतिक सत्यापन: जिला प्रशासन को तुरंत इस मामले का संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित ग्राम पंचायतों में स्थलीय भौतिक सत्यापन कराना चाहिए।
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई: जांच के दौरान जो भी प्रधान, रोजगार सेवक या अन्य कर्मचारी दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कठोर विधिक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- जवाबदेही तय हो: बिना काम के भुगतान प्राप्त करने वाले और फर्जीवाड़ा करने वाले तत्वों की मिलीभगत की तह तक जाकर जिम्मेदारी तय की जाए।
अब देखना यह होगा कि क्या जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस विस्तृत रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबा दिया जाएगा?
अजीत मिश्रा (खोजी)
मंडला ब्यूरो चीफ / डिवीज़नल हेड (बस्ती मंडल)
















