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सारंगढ़-बिलाईगढ़ में नए आपराधिक कानूनों पर प्रशिक्षण, कलेक्टर ने दिए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

सारंगढ़-बिलाईगढ़,  जिले में तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर कार्यालय सभागार में प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी पद्मिनी भोई साहू ने की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ नए कानूनों का बेहतर पालन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में एसपी सुनील शर्मा, न्यायिक अधिकारी सहित राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी और जिले के सभी थाना प्रभारी मौजूद रहे।
1 जुलाई 2024 से लागू हैं तीन नए कानून
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 देशभर में 1 जुलाई 2024 से लागू हो चुके हैं। इन कानूनों का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित और समयबद्ध बनाना है।
अधिकारियों को बताया गया कि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर नए आपराधिक कानूनों से संबंधित 76 ई-लर्निंग कोर्स उपलब्ध हैं।
ई-एफआईआर से लेकर डिजिटल साक्ष्य तक तकनीक का इस्तेमाल
नए कानूनों के तहत आपराधिक जांच और न्याय प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है। इसमें ई-एफआईआर, ई-समन, तलाशी एवं जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, फोरेंसिक साक्ष्य की वीडियोग्राफी और इलेक्ट्रॉनिक रूप से बयानों की रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इसके साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायिक कार्यवाही और पुलिस, न्यायालय, जेल, अभियोजन तथा फोरेंसिक साइंस लैब के बीच दस्तावेजों के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) का उपयोग किया जा रहा है।
गंभीर अपराधों में फोरेंसिक जांच पर जोर
प्रशिक्षण में बताया गया कि 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक विशेषज्ञों के उपयोग का प्रावधान किया गया है। वहीं गंभीर अपराधों की जांच निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने, एफआईआर और आरोप-पत्र की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया तथा पीड़ितों को जांच की प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
डिजिटल साक्ष्यों को मिली कानूनी मान्यता
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ई-मेल, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल से प्राप्त डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाने से साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी और ऑनलाइन संचार से जुड़े मामलों की जांच को मजबूती मिलेगी।
बैठक में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने अधिकारियों से कहा कि नए कानूनों के प्रावधानों की जानकारी केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, न्यायिक एवं संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

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