
ईआरसीपी और पेयजल योजनाओं को लेकर लक्ष्मणगढ़-कठूमर में उठी आवाज, पूर्व भाजपा पदाधिकारी ने क्षेत्रवासियों से की संगठित होने की अपील
गिरते भूजल स्तर और पेयजल संकट का मुद्दा उठाते हुए सरकार से क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट करने की मांग
अलवर। लक्ष्मणगढ़ और कठूमर उपखंड क्षेत्र में पेयजल समस्या एवं गिरते भूजल स्तर को लेकर भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता एवं पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुभाष तिवाड़ी ने क्षेत्रवासियों से संगठित होकर अपनी मांग सरकार और जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखने की अपील की है।
तिवाड़ी ने जारी अपील में कहा कि क्षेत्र में लगातार गिरता भूजल स्तर, वर्षा में कमी तथा प्राकृतिक जल स्रोतों की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को पेयजल संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने क्षेत्र की दीर्घकालीन पेयजल आवश्यकता को देखते हुए सरकार से योजनाओं की स्थिति स्पष्ट करने तथा आवश्यक होने पर लक्ष्मणगढ़-कठूमर क्षेत्र को संबंधित पेयजल योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है।
अपील में ईआरसीपी तथा पेयजल से संबंधित योजनाओं का उल्लेख करते हुए तिवाड़ी ने सवाल उठाया कि लक्ष्मणगढ़ और कठूमर क्षेत्र को इन योजनाओं से कितना लाभ मिल रहा है तथा क्षेत्र के लिए सरकार की आगामी कार्ययोजना क्या है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आगामी राजनीतिक एवं जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रमों के दौरान पेयजल समस्या को प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया।
तिवाड़ी ने कहा कि पेयजल किसी भी क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकता है और इस मुद्दे को राजनीतिक दलों के समर्थन या विरोध से अलग रखते हुए जनहित के विषय के रूप में उठाया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से जाति, धर्म और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर क्षेत्र की समस्याओं पर एकजुट होकर अपनी बात रखने की अपील की।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से यह भी आग्रह किया कि वे संबंधित सरकारी विभागों और जनप्रतिनिधियों से ईआरसीपी एवं पेयजल योजनाओं में क्षेत्र की वास्तविक स्थिति, स्वीकृत कार्यों, प्रस्तावित परियोजनाओं तथा मिलने वाले लाभ की आधिकारिक जानकारी प्राप्त करें।
तिवाड़ी ने अपने वक्तव्य में क्षेत्र के पुराने जल स्रोतों एवं जल संरचनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में जल संरक्षण और पेयजल उपलब्धता के लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
हालांकि, ईआरसीपी एवं संबंधित पेयजल योजनाओं में लक्ष्मणगढ़-कठूमर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति तथा क्षेत्र को योजनाओं में शामिल किए जाने या उससे संबंधित लाभ के संबंध में संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। सरकारी रिकॉर्ड अथवा संबंधित विभाग का आधिकारिक बयान प्राप्त होने के बाद इस संबंध में स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

